एस. के. पाण्डेय की बाल कविता - बीमार कबूतर

बीमार कबूतर
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(१)

एक दिन एक कबूतर आया ।
छत पे मेरे पैर जमाया ।।
मन मेरा अतिसय हर्षाया ।
दोस्ती करने को ललचाया ।।

(२)

पास मैं उसके जब-जब जाऊँ ।
सोचूँ पकडूँ पास बिठाऊँ ।।
उड़े तभी छत छोड़ न भागे ।
मैं पीछे वो उड़ता आगे ।।

(३)

मम्मी को मैंने बतलाया ।
प्यारा एक कबूतर आया ।।
छत पे है छत छोड़ न जाए ।
मन को मेरे वो अति भाए ।।

(४)

लाई लेकर मैं फिर आया ।
उसके आगे तुरत बहाया ।।
लाई उसने नहीं उठाया ।
मैं सोचूँ दोस्ती ठुकुराया ।।

(५)

मम्मी को रो-रो बतलाया ।
हमको मम्मी ने समझाया ।।
पानी लेकर हमें पठाया ।
पिया न पानी मन भर आया ।।

(६)

बैठ गया है ये थक हार ।
मम्मी बोलीं है बीमार ।।
मैं बोला कोई उपचार ।
गया लेट वो था लाचार ।।

(७)

इधर-उधर कर रहा शरीर ।
ब्याप गई थी उसको पीर ।।
मम्मी बोलीं धरिये धीर ।
लिखा वही होता तकदीर ।।

(८)

जो आता जाता संसार ।
दुनिया गई मौत से हार ।।
चला कबूतर सबसे दूर ।
क्या करता रोया भरपूर ।।

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डॉ एस के पाण्डेय,
समशापुर (उ.प्र.) ।
URL: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/
ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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