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दिलीप भाटिया का आलेख - समय का बजट (Time budget – time management - समय प्रबंधन)

अमीर के पास अरबों हैं। गरीब के पास चन्‍द रूपए। मध्‍यम व निम्‍न वर्ग वाले व्‍यक्‍ति सीमित आमदनी के कारण खर्च व बचत का बजट बनाते हैं, ताकि सम्‍भव हो तो, उधार लेने से बच सकें। पर, समय सभी के पास बराबर है। सीमित है। दिन में मात्र 24 घंटे। इस नश्‍वर शरीर का इस पृथ्‍वी पर समय भी प्रकृति/विधाता ने निश्‍चित करके ही हमें इस संसार में भेजा है। हम सब यात्री हैं। किस का स्‍टेशन कब आ जाएगा, पता नहीं। जितना भी समय हमें मिला है, उतने ही समय में हम अच्‍छे कर्म कर एक नेक इन्‍सान भी बन सकते हैं या फिर समय को व्‍यर्थ ही नष्‍ट करते हुए जीने की मात्र औपचारिकता निभा सकते हैं। इसलिए हमें समय का बजट बनाकर चलना होगा। अधिकांश हम सभी रोना रोते रहते हैं, ‘समय‘ नहीं होने का। व्‍यस्‍तता आवश्‍यक है, ‘समय‘ का सदुपयोग अधिकतम हो, उसके लिए आइए कुछ सूत्रों पर विचार करें।

अपनी दिनचर्या एक कागज पर लिख लें। मूल्‍यांकन करने पर पता चलेगा कि 20 में से 10 काम करने की आवश्‍यकता ही नहीं थी। इन 10 कामों को दैनिक दिनचर्या से हटा देंगे तो कुछ नए 5 अच्‍छे कामों के लिए स्‍वतः ही मिल जाएगा। आवश्‍यकता बिना घंटों तक फोन, इन्‍टरनेट व टेलीविजन पर समय नष्‍ट करना ही हो तो है, व्‍यावहारिकता, शिष्‍टाचार मनोरंजन निश्‍चय ही आवश्‍यक हैं। पर एक संतुलित समय सीमा में। शिष्‍टाचार के कारण दूसरा आपसे शिकायत नहीं कर रहा है पर हम अपने साथ सामने वाले का समय भी नष्‍ट कर रहे है शालीनता, विनम्रता, शिष्‍टता से रिश्‍ते निभाना, कुशल क्षेम जानना, परेशानी संकट मेंमदद करना निश्‍चय ही समय का सार्थक सदुपयोग है पर अनावश्‍यक बातचीत, निन्‍दा पुराण, बिना मतलब के संदेश/मेल फारवर्ड करना अपने साथ दूसरों के समय का भी अपव्‍यय है।

आवश्‍यक कार्यों के लिये एक डायरी लिखिये। जहां तक संभव हो काम को टालिये मत। आज व अभी ही करने की सकारात्‍मक सोच रखकर कम समय, उर्जा, शक्‍ति, धन, में बहुत अधिक किया जा सकता है अपने कार्य की गति को बढाइए आजकल कार्यालय में 10-12-14 घंटे काम करना फैशन सा हो गया है पर परिवार के लिये समय ही नहीं निकाल पाते। बेटे की होमवर्क की कॉपी देखनी है, बूढी मां का चश्‍मा ठीक करवाना है, बेटी को साइंस मॉडल बनाने के लिये टिप्‍स देने हैं, पत्‍नी को लेडी डॉक्‍टर को दिखाकर सोनोग्राफी करवानी है, पिता जी के लिये खांसी की दवाई लानी है, इत्‍यादि परिवार की आवश्‍यक्‍ताएं पूरी करने के लिये समय तभी मिल पाएगा जब हम कार्यालय/व्‍यापार को व्‍यवस्‍थित कर 8 घंटों में ही अपना निश्‍चित काम पूरा करने का प्रयास करेंगे।

कार्यालय में अपनी डाक पेन्‍डिंग नहीं रखें। ऊपर या नीचे या फाइल में जाने दें या स्‍वयं उत्‍तर देना हो तो उसी दिन उत्‍तर दे दें। मीटिंग संक्षिप्‍त व टू दीप्‍वाइन्‍ट हों। एजेंडा पहले ही निश्‍चित रहे। मीटिंग प्रारम्‍भ होने का समय हर कार्यालय में निर्धारित रहता है, पर मीटिंग समाप्‍त होने का समय भी निश्‍चित कर लें, यथा प्रातःकाल 10 से 11 बजे तक। स्‍कूल के 40 या 45 मिनिट के निश्‍चित समय के पीरियड के समान कार्यालय की मीटिंग का निश्‍चित समय विभाजन तत्‍परता व कुशलता से समय नियोजन कर एक सकारात्‍मक परिणाम देगा। जो कार्य नही आता है, पूछिए। ‘मना‘ करना भी सीखिए, हर कार्य को ‘हाँ‘ करने से व बाद में नहीं करनें से संस्‍थान का समय नष्‍ट होता है। विनम्रता पूर्वक असमर्थता बता देना ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा। कार्यालय में फोन पर अनावश्‍यक व्‍यक्‍तिगत बातें न्‍यूनतम हीहों, नहीं हों तो समय के बजट का पालन करने के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण बिन्‍दु है।

कर्मचारी व्‍यापारी, गृहिणी हर कोई अपने समय का बजट स्‍वयं ही बना सकता है। पुस्‍तकें, लेख, वार्त्ता एक मार्गदर्शक हो सकते हैं, पर हमें स्‍वयं को अपनी प्राथमिकताएं पता हैं। इसलिए स्‍वयं ही ईमानदारी से समय का सही विभाजन का बजट बनाकर पालन करना होगा। विश्राम व मनोरंजन, योग व प्राणायाम, भ्रमण व स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण ये सब भी आवश्‍यक हैं, इसलिए वर्कआउट के लिए भी समय देना होगा। घर-परिवार, मित्र-सहेली, रिश्‍ते-नातों को भी समय देना होगा, कर्मचारी मात्र कार्यालय भर का नहीं है। घर व परिवार भी जुड़े हैं, समय का बजट बनाते समय यह भी ध्‍यान में रखना होगा।

ये मात्र कुछ सूत्र हैं। एक संतुलित समय बजट बनाकर पालन करना व समीक्षा कर संशोधन करते रहना एक आवश्‍यकता है। ऊर्जा, उत्‍साह दक्षता बढ़ेगी, स्‍वास्‍थ्‍य ठीक रहेगा, उत्‍पादकता में वृद्धि होगी एवं हम से जुड़ा हर व्‍यक्‍ति हम से खुश नहीं हो चाहे, पर दुःखी भी नहीं रहेगा। समय का बजट बनाइए व स्‍वयं ही इसके सुखद परिणामों का आनन्‍द लीजिए। इति.

--

दिलीप भटिया,

372/201, न्‍यूमार्केट,

रावतभाटा-323307

मोबाइल नं ः 09461591498

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