मंगलवार, 31 जुलाई 2012

गोवर्धन यादव का आलेख - प्रेमचन्द उनका अपना जीवन खुद उपन्यास था.

       (गोवर्धन यादव) सन 1920 का दौर. गांधीजी के रुप में देश ने एक ऐसा नेतृत्व पा लिया था,जो सत्य के आग्रह पर स्वतंत्रता हासिल करना चाहता थ...

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 15 - हीरालाल प्रजापति की कहानी : एक नास्तिक की तीर्थ यात्रा

वैचारिक कहानी - एक नास्तिक की तीर्थ यात्रा [ डॉ. हीरालाल प्रजापति ] -----------------------------------------------------------------------...

विजेंद्र शर्मा का आलेख - पर मज़हब के बाट से , भाषा को मत तोल ..........

पर मज़हब के बाट से , भाषा को मत तोल .......... बीते साल राजस्थान की साहित्यिक राजधानी बीकानेर में कवियत्री सुमन गौड़ के पहले काव्य - संग्रह ...

प्रमोद कुमार चमोली का व्यंग्य - आम आदमी की नाक

शीर्षक पढ़ कर आप सोच रहें होंगे की यह भी कोई बात है ‘आम आदमी की नाक'। नाक तो क्‍या आम और क्‍या खास सभी के पास होती है। श्‍वाँस लेने के ...

धर्मेन्द्र कुमार सिंह की लम्बी कविता : प्रेम की परखनली में ईश्वर का संश्लेषण

लम्बी कविता :  प्रेम की परखनली में ईश्वर का संश्लेषण आपके मुँह में छाले हैं तो क्या हरी मिर्च को मीठा हो जाना चाहिए अगर राहु और केतु कल्पन...

ज्योति सिन्हा का आलेख : रिमझिम बरसेला सवनवा

डॉ0 ज्योति सिन्हा का आलेख : रिमझिम बरसेला सवनवा. (कजरी गीतों में विषय वैविध्‍य- एक दृष्‍टि) डॉ 0 ज्‍योति सिनहा प्रवक्‍ता - संगीत भारती मह...

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 14 - अनुलता की कहानी : महामुक्ति

महामुक्ति अनुलता राज नायर भटक रही थी वो रूह, उस भव्य शामियाने के ऊपर,जहाँ सभी के चेहरे गमज़दा थे और सबने उजले कपडे पहन रखे थे. एक शानदार म...

प्रमोद भार्गव का आलेख - असम : दंगों की वजह घुसपैठ

असम में बड़े पैमाने पर हुए दंगों की वजह साफ हो रही है। बांग्‍लादेशी घुसपैठियों ने सीमावर्ती जिलों में आबादी के घनत्‍व का स्‍वरुप तो बदला ही...

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