सोमवार, 9 जुलाई 2012

प्रभुदयाल श्रीवास्तव को साहित्य सिंधु एवं गोवर्धन यादव को कथाश्री सम्मान‌

   
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पंडित गिरिमोहन गुरु के समस्त प्रकाशित साहित्य के अवदान को रूपरंजित करती पुस्तक"समीक्षा के नये आयाम का लोकार्पण एवं डा.भेरूलाल गर्ग डा.पशुपतिनाथ उपाध्याय   प्रभुदयाल श्रीवास्तव  गोवर्धन यादव इत्यादि  को  साहित्य  सम्मान


                                    गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर पुण्य सलिला नर्मदा के तट पर बसे होशंगाबाद नगर में एक सादे परंतु गरिमा मय समारॊह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आये साहित्यकारों का सम्मान किया गया| अलीगढ़ से पधारे मूर्धन्य विद्वान श्री पशुपतिनाथ उपाध्याय  के मुख्य आतिथ्य में सम्मानों और लोकार्पण का सरस आयोजन किया गया| इस अवसर पर डा.उपाध्याय द्वारा संपादित पंडित गिरिमोहन गुरु के रचना संसार पर आधारित  पुस्तक 'समीक्षा के नये आयाम' का लोकार्पण भी किया गया गया|इसी तारतम्य में दोहा विधा को समर्पित त्रैमासिक पत्रिका"मेकलसुता" का भी विमोचन हुआ|

कुल उन्नीस साहित्यकारों कलाकारों का सम्मान किया गया| जिसमें डा. पशुपतिनाथ उपाध्याय,अलीगढ़,रविनारायण विश्वे नरसिंहपुर,डा मधु मुकुल चतुर्वेदी सवाई मधोपुर,राजेश शर्मा भवानी मंडी,ब्रजमोहन मुदगल होशंगाबाद,प्रभुदयाल श्रीवास्तव छिंदवाड़ा,गोवर्धन यादव छिंदवाड़ा,महेन्द्र दुबे पचमड़ी,श्रीमती विनोदनी तैलंग रसूलिया होशंगाबाद,शिवनारायन महलवार होशंगाबाद,रमेशचंद्र भोपाल,किशोरीलाल नेमा करेली, डा.माया दुबे भोपाल,भीमपुरी गोस्वामी संगरिया जोधपुर,नन्हूं गिरि राजगढ़ ,दीपाली शर्मा इटारसी,माताप्रसाद शुक्ल ग्वालियर,डा. भेरूलालजी गर्ग भीलवाड़ा और राजेन्द्र सिंह सिसोदिया होशंगाबाद शामिल थे|

इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का भी सरस आयोजन हुआ जिसमें अलग अलग विधाओं में कवियों ने कविता पाठ किया| कार्यक्रम का सफल संचालन हस्ताक्षरश्री के संपादक नगरश्री पंडित गिरि मोहन गुरु ने किया|  कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. गिरजा शंकर ने की|विशिष्ठ अतिथि के रूप में मंच पर सांगरिया जोधपुर से पधारे श्री भीमपुरी गोस्वामी एवं जिला शिक्षाधिकारी श्री ब्रज किशोर पटेरियाजी उपस्थित थे|


                                    इस कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता समीक्षा के नये आयाम का लोकार्पण था| जिसमें देश के मूर्धन्य साहित्यकारों श्री पशुपतिनाथ उपाध्याय,डा. कृष्ण गोपाल मिश्र,डा. शांति सुमन,डा.रामसनेहीलाल वर्मा ,डा.मुचकुन्द शर्मा,डा शरद खरे इत्यादि ने पंडित गिरि मोहन गुरु के समूचे साहित्य पर प्रकाश डाला है|

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