एस. के. पाण्डेय की बाल कविता - चिड़िया रानी

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चिड़िया रानी

(१)

चिड़िया रानी बड़ी निराली कैसा जीवन जीती है ।

चीं-चीं करके बोले गाये ये भी हँसती-रोती है ।।

छोटे-छोटे सुंदर-सुंदर पर से अपने उड़ती है ।

पकड़ न पाए कोई उड़ती फुर्ती से न गिरती है ।।

 

(२)

अपना घर ये स्वयं बनाती पेड़ के ऊपर रहती है ।

पेड़ ना काटो और लगाओ चिड़िया हमसे कहती है ।।

बेघर हो न जाऊँ इससे चिड़िया रानी डरती है ।

पेड़ कटे जो कोई भी न सोये बहुत सिसकती है ।।

 

(३)

नदी-ताल का जल ये पीती इनमें रोज नहाती है ।

ताल तलैया सुनिए भैया पाटो न ये कहती है ।।

गर्मी में ये प्यासी घूमे खोजे जल न पाती है ।

कभी-कभी ये चारा लेने हम सबके घर आती है ।।

 

(४)

दूर-दूर तक जाके चिड़िया चारा लेकर आती है ।

भूख सताए उसको लेकिन बच्चों को खिलाती है ।।

बच्चों की भूख मिटाकर ये बाद में ही खुद खाती है ।

मीठे-मीठे किस्से उनको चाव से बड़े सुनाती है ।।

बच्चों को सुलाके पहले खुद भी ये सो जाती है ।

दुःख सहकर भी चिड़िया रानी माँ का फ़र्ज निभाती है ।।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ. प्र.) ।

URL: https://sites.google.com/site/skpandeysriramkthavali/

ब्लॉग: श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो

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