शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

गोवर्धन यादव की लघुकथा - आपरेशन

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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                     आपरेशन

राजेश बेहद ही खुश था. उसके यहाँ कुछ ही दिनों में बच्चा पैदा होने वाला था. पत्नि के गर्भधारण की तिथि से वह उसे डाक्टर मेहरोत्राजी से नियमित रुप से चेक करवाता आ रहा है. डाक्टर ने डॆट भी घोषित कर दी थी. वह नियत दिन अपनी पत्नि के साथ वेटिंग रुम मे बैठकर ,अपनी बारी आने की प्रतीक्षा कर रहा था. नर्स ने जैसे ही उसका नाम पुकारा, अपनी पत्नि को साथ लेकर उसने डाक्टर के कमरे में प्रवेश किया. डाक्टर ने उसे बाहर बैठने को कहा और उसकी पत्नि का परीक्षण करना शुरु कर दिया. बाहर बैठे राजेश का . दिल जोरों से धडकने लगा था. वह सोच रहा था कि पता नहीं, मेडम डाक्टर क्या फ़रमान जारी करती हैं..

कुछ देर बाद नर्स ने आकर कहा कि मेडम ने आपको अंदर बुलाया है, आप जाकर उनसे मिल लें. धडकते दिल से उसने कमरे में प्रवेश किया और एक ओर खडा होकर डाक्टर के आदेश की प्रतीक्षा करने लगा. डाक्टर इस समय टेबल पर झुकी हुई कुछ लिख रही थीं. उन्होने उसे देखते ही कहा” मिस्टर राजेश केस थोडा क्रिटिकल हो गया है. बच्चा आंत में फ़ंस गया है. इसीलिए आपरेशन तत्काल ही किए जाने की आवश्यकता है. उन्होंने पर्चा थमाते हुए कहा”’ऊपर मेडिकल-स्टोर्स में जाकर ये सारी चीजे खरीदकर इस नर्स के हाथॊं भिजवा दें और कैश काउन्टर पर जाकर दस हजार रुपये जमा करवा दें. आधे-पौन घंटे के भीतर आपरेशन हो जाना चाहिए”. 

राजेश भौंचक था. अभी तक तो सब ठीक-ठाक था, अचानक यह सब कैसे हो गया?. थूक को हलक के नीचे उतारते हुए उसने कहा” मेडम,हम शुरु से ही मिसेस को आपसे चेक करवाते आ रहे हैं. आप ही ने कहा था कि सब ठीक चल रहा है और बिना आपारेशन के डिलिवरी हो जाएगी, अब क्या हुआ?”. “ मिस्टर राजेश,आपका कहना एकदम ठीक है. कल तक तो ऐसा नहीं था. यह सब अचानक ही होता है .क्या आपको ऐसा लगता है कि हमने बच्चे को आंत में फ़ंसा दिया. नही न!. परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं, उसी के बुताबिक चलना होता है. देखिए,बातें करके समय खराब करने से कोई फ़ायदा नहीं है. यदि आप आपरेशन नही करवाना चाहते तो किसी और डाक्टर से परामर्श से सकते हैं.” अब सोचने-समझने को कुछ भी बाकी नहीं रह गया था. उसे हर हाल मे जच्चा-बच्चा दोनों को बचाना था. वह तेजी से सीढियाँ चढने लगा था और नर्स उसके पीछे हो ली थी.

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103 कावेरी नगर ,छिन्दवाडा,म.प्र. ४८०००१
07162-

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