मंगलवार, 31 जुलाई 2012

प्रमोद कुमार चमोली का व्यंग्य - आम आदमी की नाक

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शीर्षक पढ़ कर आप सोच रहें होंगे की यह भी कोई बात है ‘आम आदमी की नाक'। नाक तो क्‍या आम और क्‍या खास सभी के पास होती है। श्‍वाँस लेने के काम आती है। सभी को गंध सुगंध दुर्गंध का अनुभव इसी से होता है। जुकाम लगने पर यह बंद हो जाती है या फिर बहने लगती है। यानि सभी के लिए यह एक ही तरीके से काम करती है। यह दीगर बात है कि इसकी आकार और आकृति हर किसी की अलग होती है। इस आकार और आकृति में कहीं किसी खास आदमी की नाक बेढंगी या अच्‍छी हो सकती, यही व्‍यवस्‍था आम आदमी के लिए भी लागू होती है। अब आप यह तो पूछ ही सकते हैं कि फिर इस आदमी की नाक के आगे ‘आम' फंसाने की क्‍या आवश्‍यकता है?

आवश्‍यकता है जनाब। आम आदमी भले ही आम हो पर उसकी नाक बड़ी खास होती है। मिडिल क्‍लास यानी तथाकथित कैटल क्‍लास का आदमी अपनी सारी जिंदगी इस इकलौती नाक को बचाने में ही गुजार देता है। यानी आम आदमी की नाक खास डेलिकेट किस्‍म की होती है। उसे यह कभी भी कटी हुई महसुस हो सकती है। इसके लिए न तो किसी अस्‍पताल में जाना पड़ता है और नहीं किसी सर्जन की आवश्‍यकता नहीं होती। यानी यह एक बड़ी ही अमूर्त किस्‍म की घटना होती है।

हमारे एक मित्र हैं डील डोल में लंबे-चौड़े कुछ दबंग सी छवि वाले। एक बार महानुभाव अपने साले की शादी में गए। अब साले की शादी में तो जीजा खास होता ही है सो वे खास बने बारात में बड़े जोर से ता ता थैया कर रहे थे। रस्‍म अदायगी सा लिया गया सोमरस उनकी नसों में उत्‍तेजना भर रहा था। वे बेहिसाब नाच रहे थे। बारात उनके नाच के कारण प्रति इंच के हिसाब से रास्‍ता तय कर रही थी। बड़े बुजुर्गों ने समझाया मुहूर्त का हवाला भी दिया पर जनाब कहाँ मानने वाले थे। सो उनके बड़े साले साहब ने बैण्‍ड वालों को आगे बढ़ावा दिया। बस फिर क्‍या था मित्र की नाक कट गई। लोगों ने बहुत समझाया पर बैण्‍ड वालों के सामने कटी नाक वापस नहीं जुड़ी। शादी का सारा मजा किरकिरा हो गया। वे नाराज होकर वहीं से वापस क्‍या लौट आए। आज तक ससुराल की चौखट में पांव नहीं रखा। उनकी इस नाक के सवाल में बेचारी भाभी जी भी ऐसी उलझी की उनका पीहर जाना ही बंद हो गया।

तो भैया यह नाक बड़ी अजीब चीज है। यह तो छोटी सी बात पर ही कट जाए नहीं कटे तो कभी भी न कटे। अब आप ही देखो न घोटाले करो, जेल जाओ पर नाक कहाँ कटती हैं। दो नंबर का पैसा है आप इन्‍कम टैक्‍स का छापा पड़ा नाक कटती नहीं वरन और ऊंची हो जाती है। हमने शोध करके यह ही पाया है कि नाक आम आदमी की ही कटती है। खास आदमी की नाक कुछ मजबूत किस्‍म की होती है।

एक बार की बात है जब हम कॉलेज में पढ़ा करते थे। हमारे एक प्रोफेसर साहब ने एक दादा किस्‍म के लड़के को पढ़ाई में ध्‍यान नहीं देने पर फटकार लगा दी। बस फिर क्‍या था दादा भाई को तो कुछ महसूस नहीं हुआ पर उनके चमचों की नाक कट गई। हंगामा हो गया। मामला तूल पकड़ गया लड़कों ने हड़ताल कर दी। लड़कों की हड़ताल के विरोध में कॉलेज स्‍टाफ भी हड़ताल में चला गया। यानि कभी कभी यह नाक का कटना बड़ा लफड़ा भी करवा देता है।

अब नाक क्‍या आजकल तो यह कुछ ज्‍यादा ही कटने लगी है। अस्‍पताल में डॉक्‍टर ने थोड़ा कम भाव दिया तो नाक कट जाती है या फिर मरीज होकर डॉक्‍टर से कुछ सवाल जबाब कर लिए तो नाक कट जाती हैं। लाईन में लगकर टिकट लेना पड़े तो नाक कट सकती है। सरकारी दफ्तर में काम करने से नाक कट जाती है। अगर किसी काम के लिए प्रक्रियावश समय लग जाए तो नाक कट जाती है। बौद्धिक कहे जाने वाले लोग भी इसी नाक की जद्‌दोंजहद में ही लगे रहते हैं। अगर वे मुख्‍य अतिथि या अध्‍यक्ष किस्‍म के बुद्धिजीवी हैं तो किसी कार्यक्रम में बतौर सामान्‍य आदमी निंमत्रण मिल जाए तो नाक कट सकती है। आपकी बात को कोई काट दे तो भी नाक कट सकती है।

नाक का कटना एक सामाजिक प्रक्रिया भी है। अपनी नाक को बचाने के लिए बेचारे आम आदमी को पैसे वालों की देखा देखी करनी जरूरी है। हमारे एक मित्र की लड़की की शादी थी। उन्‍होंने अपनी नाक कटने से बचाने के लिए बढ़ चढ़ कर खर्चा किया। उनकी नाक एक बारगी तो बच गई। पर इस नाक कटने को बचाने के चक्‍कर में भारी कर्ज के बोझ तले दबे छटपटा रहे हैं। आम आदमी नाक कटने की जद्‌दोजहद की कहानी बड़ी लंबी है। उसकी लड़की काम से देर से घर आए तो नाक कट जाती है। उसकी लड़की जींस टॉप पहन ले तो नाक कट जाती है। और हाँ अगर उसके बच्‍चे पसंद की शादी यानी लवमैरिज कर ले तो नाक कट जाती है। अब बताइए वह बिना नाक के बिरादरी के सामने कैसे जाए।

एक बार तो मित्रों हद हो गई। हम अपने एक मित्र के घर गए तो उनका मुँह लटका हुआ था। हमने कारण जाना तो ज्ञात हुआ कि आज उनके बच्‍चे का पहली कक्षा का रिजल्‍ट आया है और वह कक्षा में प्रथम नहीं द्वितिय आया है। हमने कहा भाई यह तो खुशी की बात है आप लोग मुहँ लटकाए क्‍यों बैठे हैं। इस पर उन्‍होंने कहा कि पड़ोसी का बच्‍चा प्रथम आया है इसलिए उनकी नाक कट गई। उनका बच्‍चा इस नाक कटने के दुख से दूर खेल रहा था। हमें तो इस नाक की लड़ाई को देख कर ऐसा लगता है कि कितना अच्‍छा होता यदि उपर वाला आदमी की नाक ही नहीं बनाता न तो बांस होता नहीं बांसुरी बजती ।

12 blogger-facebook:

  1. उत्तर
    1. शुक्रिया विजेन्द्र शर्मा साहब

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    2. allah kare .....our kuchh bache na bache ...bas naak bach jaaye ...ek baar punah badhaai ...achhe vayang ke liye

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    3. शुक्रिया मित्र

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    4. Bahut aacha article hai..... Maaja aah gaya. Keep it good work Pramod.

      Proud of you.....

      हटाएं
    5. Bahut AACHA HAI.... padkar maaja aah gaya.....
      KEEP IT GOOD WORK!!

      हटाएं
    6. शुक्रिया मित्र हरदेश

      हटाएं
  2. सच है ! अब आम आदमी के पास बस नाक ही तो बची है , जिसकी चिंता उसे हमेशा सताती है , बाकि तो सरकार ने छीन लिया है

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    उत्तर
    1. सही कहा मुकेश जी ,आभार

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  3. SAMJHO TO NAK HAE NAHIN TO NAKTE,
    AUR JAB NAKTE HAEN TO UNHEN KUCH KAH NAHIN SAKTE,
    KUCH KAH DIYA TO APNI HI NAK JAYEGI,
    UNKE TO HAE NAHIN,TO KUCH BJGAD BHI NAHIN SAKTE

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपने सही कहा डॉ महेंद्रजी आभार

    उत्तर देंहटाएं

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