सोमवार, 9 जुलाई 2012

एस के पाण्डेय की लघुकथा - गरीबी

गरीबी

रामप्रकाश खेत में था। वेटी सुनीता और वेटे निखिल को खेत में आते देखकर रामप्रकाश ने पूछा कि आज तुम लोग स्कूल क्यों नहीं गए ?

निखिल बोला ‘मम्मी ने रोक दिया है’। रामप्रकाश बोला ‘घर चलो अभी तुम्हारी मम्मी से पूछते हैं’।

सुनीता बोली ‘कल फीस जमा करने की अंतिम तारीख है। और आज घर पर मौसी आने वाली हैं। मम्मी कह रही थीं कि जब मौसी जाने लगेंगी तो हम लोगों को रुपया देंगी। जिससे कल हम लोगों की फीस जमा हो जायेगी’।

निखिल बोला ‘अगर हम लोग घर पर ही नहीं रहेंगे तो मौसी से पैसा कैसे मिलेगा ? और परसों हम लोगों का नाम कट जायेगा’।

रामप्रकाश ने बच्चों से कहा ‘अगर तुम्हारी मौसी पूछें कि तुम लोग स्कूल क्यों नहीं गए तो उनसे यह सब मत बताना’। यह कहते हुए उसे अपनी गरीबी पर आँसू आ गए।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

ब्लॉग: श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो

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