सोमवार, 16 जुलाई 2012

राधेश्‍याम ‘भारतीय' की लघुकथाएं

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वह जम्‍मू से माता वैष्‍णो के दर्शन कर आज ही घर लौटा था। आते ही बच्‍चों ने घेर लिया और अपने लिए लाई चीजों की मांग करने लगे । बच्‍चों को उनकी चीजें थमा दी गईं।

पास ही मां बैठी थी । उसने बैग से एक कश्‍मीरी शाल निकाल कर मां को दी। शाल देते समय उसकी नजर मां के चेहरे पर पड़ी। उसने देखा तो पाया कि मां का चेहरा ऐसे नहीं खिला जैसे खिलना चाहिए था। उसने मां से पूछा, ‘‘ मां क्‍या बात है, तबीयत तो ठीक है न ?''

‘‘हॉ !'' मां ने इतना ही कहा।

फिर उसने एक जर्सी और जैकेट निकालकर मां को देते हुए कहा,‘‘मां यह रमेश के लिए और जैकेट सुरेश के लिए।''

इस बार भी उसने मां का चेहरा पढ़ने की कोशिश की। पर, इस बार मां के चेहरे पर प्रसन्‍नता की एक लहर दौड़ती-सी नजर आयी।

मां ने कहा, ‘‘बेटे! तुम्‍हारे भाई भले ही अलग-अलग रहने लगे हों, पर तू उनका कितना ख्‍याल रखता है। मां इतना कह सामान लेकर अपने कमरे में चली गईं

अब पत्‍नी के व्‍यंग्‍य-बाण छूटे, ‘‘बस, भाइयों की चिंता रहती है....बच्‍चों को भूल जायेंगे .....घरवाली को भूल जायेंगे , पर भाई... भाइयों के लिए जान दे देंगे.... भाई, भाई न हुए मानो खुदा हो गए हो.....''

पत्‍नी बोले जा रही थी , पर वह तो दीवार पर टंगी पिता जी की तस्‍वीर की ओर देखे जा रहा था, जो उन्‍हें बचपन मे ही छोड़कर चल बसे थे।

 

गिद्ध

रमलू की बेटी पढ़ने शहर जाया करती थी।

आज वह बस अड्‌डे पर बस से उतरी तो आसमान में धुंधलका छाया था। वह पगडंडी की राह पकड़ अपनी बस्‍ती की ओर चल पड़ी । वह तेज कदमों से चली जा रही थी ताकि मौसम की मार से पहले ही घर पहुंच जाए। पर, ऐसा हो न सका क्‍योंकि बीच रास्‍ते आदमी की खाल में पहले से ही छुपे बैठे तीन भेड़ियों ने उसे अपनी हवस का शिकार बना डाला।

वह जैसे तैसे घर पहुंची। जो बात जुबान न कह सकी उसे आंसुओं न कह डाला।

यह सुन पिता का खून खोल उठा। पर, उन भेड़ियों के बाहुबल और हर जगह उनके दबदबे ने उस खून को वहीं ठंडा कर दिया।

उसकी बेटी के सारे सपने चूर-चूर हो गए। उसे अपनी जिंदगी व्‍यर्थ में घिरनी-सी घूमती नजर आई। जिसमें न कोई दिशा......न ही कोई उत्‍साह।

अगली सुबह उसकी लाश शहतीर से बंधी रस्‍सी पर झूल रही थी।

शमशान घाट में उसकी चिता धूं-धूं कर जल उठी।

जब वे वहॉ से लौटने लगे तो रमलू की नजर उन गिद्धों के झूंड पर पड़ी जो एक बीमार और असहाय कटड़ी की देह नोंचने में जुटा था।

जबकि कटड़ी अभी मरी नहीं थी।

 

थप्‍पड़ और पूरी

उस दिन मैं एक शादी में भोजनोपरांत बाहर गेट के पास खड़ा कुल्‍ला कर रहा था कि एक पुरूष स्‍वर सुनाई पड़ा ,‘‘ मार साले को , न जाने कहॉ से चला आया।''

पर, न जाने क्‍या सोचकर उसने एक लड़के से कहा ,‘‘ इसे दो लड्‌डू देकर चलता कर । ''

मैंने मुड़कर देखा तो पाया कि एक भिखारीनुमा बालक शामियाने में घुसने का प्रयास कर रहा था। मालिक ने उसे ऐसा करते हए देख लिया था। मालिक ने जिस लड़के से कहा था वह भी बड़ा उस्‍ताद निकला। उसने पहले तो बालक को एक थप्‍पड़ जड़ा , फिर उसके हाथ में दो लड्‌डू थमाते हुए कहा,‘‘ भाग जा यहॉ से ।''

लड्‌डू लेकर बच्‍चे ने बड़ी ही मासूमियत के साथ कहा,‘‘ बाबू जी! एक थप्‍पड़ और मार लीजिए.....पर, दो पूरियां दे दीजिए।

 

बाढ़-राहत

बाढ़ ग्रस्‍त लोगों की सहायतार्थ एक सरकारी आदेश गांव के मुखिया के नाम आया।

आप दो सूचियां तैयार करें। पहली सूची उन लोगों की जिनका नुकसान ज्‍यादा हुआ है, उन्‍हें सहायता राशि पहले दी जायेगी। दूसरी सूची उनकी जिनका नुकसान कम हुआ है उन्‍हें सहायता बाद में दी जायेगी।

दो दिन बाद एक अधिकारी राहत -राशि बांटने आया।

मुखिया द्‌वारा जो सूची अधिकारी को दी गई उसके अनुसार पहली सूची में वे नाम थे , जिन्‍होंने पंचायत चुनाव में मुखिया का साथ दिया था और दूसरी में वे नाम थे जिन्‍होंने मुखिया के प्रतिद्वंद्वी का साथ दिया।

 

इतिहास

भेड़ों का आपस में झगड़ा हो गया।

झगड़ा भेड़ों का हुआ और चेहरे पर रौनक छाई भेड़िए के। छानी ही थी क्‍योंकि हर बार भेड़िया ही तो करवाता आया है भेड़ों का समझौता। भेड़िया इसकी एवज में खाता आया है दोंनो पक्षों से खूब मलाई।

आज वह अपने ठिकाने से एक पल को भी कहीं न गया क्‍योंकि न जाने कब कौन-सा पक्ष आ जाए।

सुबह से शाम हो गई। पर, भेड़े न आई।

वह यह सोचकर कि कहीं भेड़ें भूल न गई हों, सो वह स्‍वयं ही उनके घर की ओर चल दिया। वहां पहुंचते ही उसके होश उड़ गए और उसे अपने पैरों तले से जमीन खिसकती -सी नजर आई। उसने देखा कि झगड़ने वाली भेड़ें आपस में बतिया रही हैं और उनकी पढ़ी-लिखी एवं समझदार संतानें पास ही खड़ी खिलखिलाकर हँस रही हैं।

अब भेड़िये को अपना इतिहास बदलता नजर आया और इसी डर के मारे वह वहां से भाग लिया।

2 blogger-facebook:

  1. यथार्थ परक कहानियां बहुत सुंदर.

    सादर,
    शिवेंद्र मोहन सिंह

    उत्तर देंहटाएं
  2. सूचनाः

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