सोमवार, 23 जुलाई 2012

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - अंत

अंत

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माधव ने मुझसे पूछा “ क्या सचमुच एक दिन सम्पूर्ण मानव जाति का अंत हो जायेगा ? मैंने सुना है जो हस्र डायनासोरों का हुआ, वही मनुष्यों का भी होगा”।

मैंने कहा “ मानव जाति का ही नहीं सम्पूर्ण सृष्टि का ही अंत हो जायेगा। यह अध्यात्मिक मान्यता भी है। और विज्ञान भी ऐसा ही संकेत दे रहा है तथा एक नहीं अनेक तरह से सृष्टि के अंत का वकालत कर रहा है”।

माधव बोला “डायनासोरों के अंत की तरह ही मानवों का भी अंत होगा। इसका क्या मतलब है ?

मैंने बताया “ यह एक वैज्ञानिक अवधारणा से जुड़ा प्रश्न है। ऐसा माना जाता है कि पहले मेल डायनासोरों का अंत हुआ था। बाद में एक समय ऐसा आ गया कि केवल फिमेल डायनासोर ही शेष बचीं। इस प्रकार डायनासोरों का अंत हो गया”।

माधव बोला “ तो क्या कुछ दिन बाद पृथ्वी पर केवल महिलाएं ही शेष रह जाएँगी” ?

मैंने बताया “ विज्ञान की मानें तो ऐसा ही होगा। या यूँ कहें की ऐसा होने की संभावना है।

कुछ दिन बाद पृथ्वी पर सारे पुरुष स्टरलाइज्ड (निर्बीज) होकर अंत को प्राप्त हो जाएंगे। उसके बाद केवल महिलाएं रह जाएँगी। लेकिन अकेले महिलाएं क्या करेंगी यानी कब तक रहेंगी ? अतः कुछ दिन बाद धरती से मानव का अंत हो जायेगा।

कुलमिलाकर अंत तो होना ही है। कब और कैसे होगा ? यह दूसरी बात है”।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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