बुधवार, 15 अगस्त 2012

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -38- छत्र पाल की कहानी : आकाशवृत्ति

आकाशवृत्ति

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छत्र पाल

सभी जानते हैं “क” सर कितने अनुशासन प्रिय, कितने समय के पाबंद एवं कितने ईमानदार हैं। सभी उनसे मन ही मन कुढ़ते हैं यह कह कर कि सा... “क” न खुद खाता है न ही हमें खाने देता है।

गुडमार्निंग सर “ख” ने “क” सर को देख कर अभिवादन किया।

गुडमार्निंग मिस्टर “ख”, कैसे है? कहाँ जा रहे हैं?

सर लाँड्री तक जा रहा था ठण्ड पड़ने लगी है न, सूट उठाने हैं।
अच्छा अच्छा, यार मेरी भी मदद करो, मेरी गाड़ी रिपेयर में गयी है, नहीं तो मैं खुद ही आपके साथ चलता।

सर क्यों शर्मिंदा करते हैं हुक्म करें, क्या करना है? “ख” मानो कृतार्थ हुआ।

कुछ ज्यादा नहीं मेरे दो और मेरे बेटे का एक सूट लांड्री से उठाना है।

सर मुझे बिल दे दीजिए मैं जा ही रहा हूँ, आपके सूट भी उठा लाऊँगा।

नहीं सर ये नहीं हो सकता कि इतनी छोटी सी बात के लिए मैं आपसे पैसे लूं। वैसे भी सर इतने वर्षों में पहली बार आपने इस नाचीज को आपकी कुछ सेवा करने का मौका दिया है, प्लीज सर मैं ये पैसे न ले सकूंगा।

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रु. 15,000 के 'रचनाकार कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन' में आप भी भाग ले सकते हैं. पुरस्कार व प्रायोजन स्वरूप आप अपनी किताबें पुरस्कृतों को भेंट दे सकते हैं. अंतिम तिथि 30 सितम्बर 2012

अधिक व अद्यतन जानकारी के लिए यह कड़ी देखें - http://www.rachanakar.org/2012/07/blog-post_07.html

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हेलो कौन मिस्टर “ग” बोल रहे हैं? मैं “क” बोल रहा हूँ।

सर, सर गुडमार्निंग सर, बताएं सर कैसे याद किया?

आप मिस्टर “घ” की बेटी की शादी अटेंड करने जा रहे है क्या?

सर जाना तो पड़ेगा, करीबी सहकर्मी हैं, मैंने तो सर आपके पास छुट्टी की अर्जी भी भिजवा दी है।

छुट्टी तो खैर स्वीकृत हो ही जायेगी। आप जा ही रहे हैं तो मेरी तरफ से भी उनकी बेटी को ग्यारह सौ एक रूपये का कवर बेस्ट विशिस के तौर पर दे देना। हेडक्वार्टर से कुछ अधिकारी आने वाले हैं अतः मेरा जाना संभव न होगा, मिस्टर “घ” को बता देना। और हाँ कल तो आप आफिस आ ही रहे हैं, पैसे मुझसे जरूर लेजाना।

सर पैसे क्या भागे जा रहे हैं, ले लूंगा। हें हें हें सर।

अरे भाई “च”, आप तो कमाल का एस्थेटिक सेन्स रखते हैं “छ” बता रहा था कि आपने घर पर जो परदे लगवाए हैं बड़े ही सुन्दर और सस्ते हैं। ऐसे परदे इस शहर में तो मिलते नहीं हैं, कहाँ से मंगवाये हैं?

हें हें हें सर वो तो श्रीमती जी मायके गयीं थीं वहीँ से ले आयीं थीं।

सर यदि आपको इतने पसंद आये हैं तो आदेश दें। अबकी बार जायेंगीं तो आपको भी मंगवा दूँगा।

ठीक है आप पहले पैसे मुझसे ले लीजियेगा और भाभी जब भी मायके जाएँ तो दो दर्जन परदे मेरे लिए भी मांगा दें।

सर आप शर्मिंदा न करें। मिसेज के भाई की सूरत में पर्दों की थोक की दुकान हैं। आप हम लोगों पर इतनी महेरवानी की नज़र रखते हैं यही हमारे लिए काफी है, हम भी अगर कभी कभार आपको तोहफा दे दें तो कौन सी बड़ी आफत आ जायेगी?

जरा “ज” को मेरे चैम्बर में भेजो।

मार्निंग सर, अपने याद किया सर?

हाँ बैठो “ज”।

थैंक्यू सर।

“ज”, सुना है इस दिवाली तुम सपरिवार घूमने नेपाल जा रहे हो।

जी हां सर वहाँ मेरा साला कांट्रेक्टर है, उसी ने बुलाया है।

अच्छा तो ससुराल के मज़े लूटने जा रहे हो। सुना है वहाँ ऊनी कपडे़ व कम्बल बहुत उम्दा व बहुत ही सस्ते मिल जाते हैं। लीजिए यह पांच हज़ार रूपये और मेरे परिवार वालों के मीजर्मेंट की पर्ची। सभी के लिए उनी स्वेटर, जेकेट ले आना और चार कम्बल बढ़िया क्वालिटी के जरूर लाना। सुनो यदि पांच हज़ार से ज्यादा लगें तो लगा देना, वापिस आने पर मिल जायेंगे।

सर बस मीजर्मेंट की पर्ची दे दीजिये, पैसे आप अभी रखिये, सेवक इतना गयागुजरा नहीं है कि आपसे पैसे ले।

नहीं मिस्टर “ज”, ये तो ठीक नहीं होगा, आप तो जानते हैं कि मैं...

नहीं सर प्लीज...

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रचनाकर -  "छत्र  पाल"

35-शिवम टेनेमेंट्स, वल्लभ पार्क,

साबरमती, अहमदाबाद (गुजरात)382424

ईमेल-crmsvkkvsmrs@gmail.com

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