गुरुवार, 23 अगस्त 2012

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -55- दोमुंहे जानवर

 

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कहानी

दो मुंहे जानवर

सोनल रस्तोगी

सच में घुटन होती है इस समाज में इन लोगों के बीच ..मुग्धा ने अपने चेहरे से पसीना पोंछते हुए सोचा, वो अभी भी पसीने से भीगी अपनी पीठ पर मिस्टर शुक्ला की निगाहें महसूस कर रही थी उस आदमी को देख कर हमेशा मुग्धा को लिजलिजापन महसूस होता है ...जैसे भाव छिपकली को देख कर आते हैं वही भाव.


५६ साल का, आँखों से टपकती वासना, उसके मन की कुंठा उसके पूरे व्यक्तित्व से झलकती है, ज्वाइन करते समय ही लोगों ने दबी जबान मिस्टर शुक्ला की सस्ती हरकतों के प्रति सचेत कर दिया था... किसी पेपर को आगे भेजने से पहले उस कमीने के हस्ताक्षर करवाने पड़ते हैं और हस्ताक्षर करवाने के लिए उसके सामने बैठना पड़ता ..उस पंद्रह मिनट में मुग्धा न जाने कितनी बार मानसिक बलात्कार का शिकार हो जाती, मन करता आँखें फोड़ दे ..पर ऐसी कोई हरकत प्रत्यक्ष रूप से नहीं हुई थी..

एक दो बार अपने सहयोगी से कहने की कोशिश की ..उसने व्यंग से कहा बहुत पहुँच है इसकी " जस्ट इग्नोर" क्यों मन खराब करती है
उसकी पहुँच काफी ऊपर तक है.....
किसी के कुछ ना कहने से शुक्ला की हिम्मत पिछले कुछ समय से बढ गई थी. एक दिन उसके ऑफिस की सहयोगी सुधा वाशरूम में सुबक रही थी मुग्धा के पूछने पर पता चला शुक्ला ने उसकी फाइल में करेक्शन करने के बहाने उसको छूने की कोशिश की, मुग्धा अन्दर तक सुलग गई, बर्दाश्त कैसे किया तूने सुधा वहीँ खीच कर मारा क्यों नहीं ... निशा बोली मुग्धा जाने दे सुधा पर बहुत सी जिम्मेदारी है अकेली है इस समय घर पर कमाने वाली , नहीं बोल पाई होगी....

इस घटना के बाद मुग्धा की नफरत इस हद तक बढ़ गई की उसके चेहरे के भाव शुक्ला को देखते ही विकृत हो जाते.....
मुग्धा जैसे ही कागज़ समेट कर उठी निशा ने पूछा कहाँ मैडम ...मुग्धा ने तल्ख़ आवाज़ में कहा वहीँ सियार के रूम में बहुत जरूरी पेपर है आज ही फाइल करने हैं ...संभल कर,बहुत जंच रही हो निशा ने मुस्कुरा कर कहा, अनसुना कर तेज क़दमों से मुग्धा मिस्टर शुक्ला के रूम में पहुंची .
आइये आइये मिस जोशी बैठिये...शुक्ला की निगाहों में लालच साफ़ दिख रहा था , सर कुछ जरूरी पेपर दिखाने थे मुग्धा ने जल्दी काम निबटाने का सोच फाइल खोल ली,
"काफी कमज़ोर हो गई हैं बीमार थी क्या " शुक्ला की निगाहें मुग्धा के शारीर से चिपकी हुई थी ..."कुत्ते बीमार तो तू पडेगा " मुग्धा ने अपना गुस्सा मन में दबाते हुए बुदबुदाया..
"ये डाक्यूमेंट तो पूरा नहीं है" फाइल हाथ में लेकर शुक्ला मुग्धा के पास आकर खडा हो गया .
"क्या छूट गया सर " मुग्धा ने खड़े होने की कोशिश की
शुक्ला ने कंधे पर हाथ रखते हुए बोला "अरे बैठो मैं दिखता हूँ " शुक्ला का स्पर्श मुग्धा को सौ बिच्छुओं के डंक जैसा लगा..
फाइल में लाइन ठीक करवाने के बहाने शुक्ला उसके नज़दीक आता जा रहा था ..मुग्धा की असहजता ने उसका दिमाग सुन्न कर दिया वो समझ नहीं पा रही थी क्या करे अचानक अनजान बनते हुए शुक्ला ने पीछे से अपना हाथ मुग्धा के हाथ पर रख दिया..अचानक मुग्धा ने तेजी से अपनी कोहनी शुक्ला के पेट पर मार दी अनायास हुई इस प्रतिक्रया से शुक्ला संभल नहीं पाया और फर्श पर गिर पड़ा...मुग्धा के मन का ज्वालामुखी फट पड़ा...

"क्या समझते हो कोई लड़की जॉब करने निकली है तो वो बाज़ार में खड़ी है, जो मर्जी आये करोगे कोई बोलेगा नहीं, तुम्हारी हरकतों से तुम्हारे संस्कार दीखते है.......एक सांस में बोले जा रही थी जब होश आया तो शुक्ला सकपकाया सा कोने में खड़ा था और पूरा ऑफिस इकठ्ठा हो चुका था, जी.एम. साहिब भी हक्के बक्के से देख रहे थे, वहां खड़ी सभी लड़कियों को सारा माजरा समझ आ गया था......... शुक्ला पर विभागीय जांच होनी तय हो गई
मुग्धा वाशरूम में अपने हाँथ धोये जा रही थी घिन से आज उसने उस लिजलिजे दोमुहे जानवर को हाँथ से पकड़ कर दूर फेक दिया था, उसका असली रूप सबके सामने आ गया था ...
--
Sonal Rastogi

7 blogger-facebook:

  1. बहुत बढ़िया कहानी....
    सच है डर कर काम नहीं चलता...हिम्मती होना ही होगा नारियों को...

    अनु

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  2. कहानी यथार्थ लिए हुए है .... समाज में ऐसे दोमुंहे लोहों की कोई कमी नहीं ! स्त्रियों को ऐसी समस्यायों से आये दिन सामना करना पड़ता है !
    आज की नारी को 'मुग्धा' जैसा ही बनना पड़ेगा !
    -
    बढ़िया लगी कहानी
    आभार

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. दो मुँहे जानवर का बहुत सजीव चित्रण किया है आपने!
    कंपनियों में Code of Conduct नाम की चीज़ भी होती है! पता नहीं लोग उसका इस्तेमाल क्यों नहीं करते...या फिर वो सिर्फ़ बड़ी कंपनियों में ही जानी समझी जाती है... :(
    ~सादर !

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    उत्तर
    1. बहुराष्ट्रीय कंपनी नारी हितैषी है ..वहां उनके अधिकारों का ध्यान रखा जाता है और उनकी शिकायत सुनी भी जाती है ..पर भारतीय कंपनियों में बेहद टरकाऊ रवैया देखने को मिलता है

      हटाएं
  5. sachhaie ko batati kahani,n jane kitne shukla aaj offices men bhare pade haen,unse niptne ki prerna deti sundar kahani,BADHAIE

    उत्तर देंहटाएं
  6. sachhaie ko batati ssundar kahani,n jane kitne shukla aaj offices men bhare pade haen, unse niptne ka sandesh deti rachna,bus thode sahas ki jaroorat, BADHAIE sundar rachna ke liye

    उत्तर देंहटाएं

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