गुरुवार, 16 अगस्त 2012

उमेश कुमार चौरसिया की दो लघुकथाएं

image

लघु कथा ः-

सपना टूट गया․․․․․․

गर्भवती मीनू को अचानक प्रसव वेदना शुरू हो गयी। तुरन्‍त नर्सिंग होग लाया गया। दो घण्‍टे की सुखद वेदना के उपरान्‍त मीनू ने सुन्‍दर कन्‍या को जन्‍म दिया। जैसे ही नर्स ने बाहर खड़े परिजनों को यह समाचार सुनाया, मीनू के सास-ससुर तो वहीं पर जैसे खुशी से नाचने लगे। सास बोली-‘‘भगवान का शुक्र है, जो लक्ष्‍मी घर आयी। हमारे तो भाग खुल गए।‘‘ और तुरन्‍त बटुए से पाँच सौ का नोट निकालकर नर्स को नेग दी। ससुर ने हर्षित होकर पुत्र विनय से कहा-‘‘बेटा, बड़ी भाग्‍यवान है मीनू। पहली सन्‍तान ही बेटी दे दी। साक्षात माँ दुर्गा घर आयी हैं। अब हमें और क्‍या चाहिए।‘‘ विनय भी खुशी से उछलता हुआ बोला-‘‘हाँ पापा, मैं बहुब खुश हूँ। मैं मिठाई लेकर आता हूँ।‘‘ सास बोली-‘‘पाँच किलो लड्‌डू लाना, पूरे अस्‍पताल में बांटना है।‘‘

तीसरे दिन नवोदित कन्‍या को गोद में लिये मीनू घर लौटी, तो सास द्वार पर खड़ी होकर खुशी से थाल बजा रही है। पास-पड़ौस की औरतें एकत्र हो गई हैं। एक महिला ने कहा-‘‘वाह अम्‍माजी, आपकी बहू ने तो आपकी मुराद पूरी कर दी। बधाई हो।‘‘ दूसरी बोली-‘‘कौन नहीं चाहता कि पहली बार में ही घर में लक्ष्‍मी आ जाए। भई विनय तो सचमुच बड़ा किस्‍मत वाला है। बधाई हो अम्‍माजी।‘‘ सास बोली-‘‘आप सबको भी बधाई। सब मिठाई खाकर ही जाना।‘‘ फिर सास ने मीनू की ननद को आवाज लगाकर आरती का थाल मंगाया और मनपूर्वक मीनू की उतारी, फिर नवोदित कन्‍या को तुरन्‍त अपनी गोद में लेकर दुलारते हुए भीतर आयीं। मीनू से कहा-‘‘ जा बेटा भीतर जाकर आराम कर ले, थक गयी होगी।‘‘ ससुर, विनय और ननद सबको मिठाई के डिब्‍बे और माँ दुर्गा की तस्‍वीर बांट रहे हैं। मीनू कमरे में जाकर बिस्‍तर पर सो जाती है, तभी सास की कर्कश आवाज सुनाई पड़ती है-‘‘कहाँ मर गयी, अरे कितनी देर बिस्‍तर पर पड़ी रहेगी आलसी․․․․․․․․।‘‘ मीनू की आँख खुल गयी । सपना टूट गया․․․․․․․․․․․․․․․․․

 

लघु कथा ः-

कैसा भगवान!

एक भव्‍य प्रसव केन्‍द्र। मुख्‍य द्वार पर बड़े बोर्ड पर लिख है-‘यहाँ नये जीवन का आरंभ होता है।‘ एक कार द्वार पर आकर रूकती है। एक गर्भवती स्‍त्री को संभाले हुए उसका पति व सास-ससुर भीतर लाते हैं। डॉक्‍टर उन्‍हें देखते ही खिल उठता है-‘‘आइये, मैं आपकी ही प्रतीक्षा कर रहा था। पेशेंट को भीतर ले जाइये।‘‘ गर्भवती स्‍त्री आशंकित है-‘‘डॉक्‍टर साहब, मुझे हुआ क्‍या है? कोई कॉम्‍प्‍लीकेशन है क्‍या?‘‘ डॉक्‍टर से पहले ही पति बोलता है-‘‘ नहीं, नहीं, तुम घबराओ मत। ये तो रूटीन चैकअप है। डॉक्‍टर साहब सब संभाल लेंगे।‘‘ नर्स उसे भीतर ले जाती है। सास फुसफुसाती है-‘‘डॉक्‍टर साहब, आज सही मौका है, गर्भपात करा ही दो। मुझे पोती का मुँह नहीं देखना।‘‘ पति ने समर्थन किया-‘‘बड़ी मुश्‍किल से बहला कर लाये हैं, आज तो निपटा ही दो।‘‘ ससुर संजीदा थे-‘‘क्‍या करें, लड़की को पालना आज के माहौल में कितना कठिन है, फिर भारी दहेज देकर विदा करो। लड़का होता तो सेवा करता। समाज ही विवश करता है क्‍या करें।‘‘ डॉक्‍टर की पत्‍नि भी वहीं प्रसव विशेषज्ञ है। वह तुरंत हँसकर बोली-‘‘आप तो फीस वहाँ जमा करा दीजिए, बाकी हम देख लेंगे। ये तो हमारा रोज का काम है।‘‘

उसी रात प्रसव केन्‍द्र के पिछवाड़े में क्षत-विक्षत कन्‍या भ्रूण के गोश्‍त को कुत्‍ते खा रहे थे।

--

उमेश कुमार चौरसिया

सह-संपादक ‘राजस्‍थान बोर्ड शिक्षण

50, महादेव कॉलोनी, नागफणी, बोराज रोड., अजमेर-305001(राज․

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------