मंगलवार, 21 अगस्त 2012

पुस्तक समीक्षा - म्यूनिसिपैलिटी का भैंसा

पुस्‍तक समीक्षा

समीक्षक - दिलीप भाटिया

रावतभाटा - 323307

म्‍यूनिसिपैलिटी का भैंसा (कहानी - संकलन)

लेखिका माला वर्मा,

हाजीनगर 743135

प्रकाशक - समय प्रकाशन, नई दिल्‍ली -

पृष्‍ठ 200

मूल्‍य रू. 275

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देश की चिर परिचित लेखिका माला ने 20 कहानियों का अपना दूसरा कहानी संकलन साहित्‍य प्रेमियों को चिन्‍तन, मनन्‌ मंथन के लिए एक अनमोल उपहार स्‍वरूप दिया है।

समय का अभाव, तनाव का रोना, शहरों की अस्‍त-व्‍यस्‍त 18-20 घंटों की दिनचर्या के कारण 80 प्रतिशत व्‍यक्‍ति टूटे, बिखरे, दुःखी से रहते हैं। उन सबको यह संकलन बचपन के घर गांव, दादी का दुलार, नानी का प्‍यार, बुआ का आशीर्वाद मौसी की संभाल, मामा का प्‍यार याद दिला देगा। गांव की मिट्‌टी से जुडी ये कहानियां उन सबकी तन मन की थकान मिटाकर ऊर्जावान कर देगी।

अम्‍मा का इशरत के प्रति हृदय परिवर्त्तन, हरि शिव शंकर लाडले पुत्र का दुखद अंत, सुखविन्‍दर का संघर्ष, पीहर की भेंट कटहल की बेकद्री, दीपावली पर बेटियों का पीहर में संगम, गंगासागर स्‍नान यात्रा के पश्‍चात्‌ गांव की बुआ का बहू को मूल्‍यवान सीताहार की आशीष, नीलिमा का गांव की तारों भरी रात देखने की इच्‍छा, रोमी दी की सुमीत भैया को जन्‍म-दिन पर फोन नहीं कर पाने की छटपटाहट, जगेसर की समर्पण भावना, राधो के दूसरे विवाह की विचित्रताऐं, भैंसे का क्षमा का पाठ पढ़ाना, नंदलाल बाबू की ओवर कोट की चिन्‍ता, लोटन की समझ, परिमल के संस्‍कार, दीप बेटे का मम्‍मी का जन्‍म-दिन भूल जाना, इत्‍यादि मन को छू लेने वाले प्रसंग हर कहानी में मिलेंगे।

इस संकलन की रचनाओं को पढ़ते हुए आंखे छलकेंगी, मन कभी भारी होगा, कभी हल्‍कापन महसूस होगा। जीवन का पुराना एलबम सामने आएगा। एक सुकून-संतोष मिलेगा, जिसके लिए आज सभी भौतिकवादी वातावरण में तरस रहे हैं। रिश्‍तों की सुगंध, अपनापन, निर्मल स्‍नेह, पवित्र प्‍यार, सात्‍विक संभाल भाव विभोर कर देगी।

मुद्रण त्रुटिहीन है। मध्‍यम वर्ग को पुस्‍तक लेने से पूर्व मूल्‍य कुछ अखरेगा, परन्‍तु पढ़ने के बाद मूल्‍य सार्थक लगेगा। अम्‍मा क्‍या हुआ ? या गंगासागर जैसा गरिमामय शीर्षक अधिक आकर्षित करता।

संकलन के लिए लेखिका की सशक्‍त कलम को नमन, सत्‍साहित्‍य पढ़ने के जिज्ञासु निश्‍चय ही लेखिका के अगले संकलन को पढ़ने के लिए उत्‍सुक रहेंगे। इति. -

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