विजय वर्मा तथा बच्चन पाठक 'सलिल' की बाल कविताएँ

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विजय वर्मा की बाल कविता

मक्खी रानी

मक्खी  रानी,  मक्खी रानी

करो ना तुम इतनी शैतानी.

 

इधर-उधर क्यों उड़ती हो?

स्वच्छता  से क्यों कुढ़ती हो?

 

गन्दगी पर ही बैठती हो

फिर भी इतना ऐठती हो.

 

परेशां करती नाहक हो,

तुम रोगों की वाहक हो.

 

बंदर को तुमने किया अवाक,

उसने काटी राजा की नाक.

 

जिस खाने पर बैठी मक्खी ,

उसे न खाना,नहीं होती अच्छी

 

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v k verma,sr.chemist,D.V.C.,BTPS

BOKARO THERMAL,BOKARO
vijayvermavijay560@gmail.com

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बच्चन पाठक 'सलिल' की बाल-कविता


नन्हे बाबू

नन्हे बाबू बड़े हो गए,
पढने जाते शाला,
सीखेंगे अंको की गिनती,
फिर वर्णों की माला.


अब न सताते हैं मुन्नी को,
बन्द हो गया उनका रोना,
कक्षा में उनके साथी हैं
भोला ,डिम्पल ,मोना,
टीचर जी को करें नमस्ते,


पाते सबका प्यार,
खेल कूद में अव्वल आते,
पढने में पाते उपहार.


पढ़ कर वे विद्वान बनेंगे,
भारत माँ की शान बनेंगे,
सबकी सदा करेंगे सेवा,
वे सच्चे इंसान बनेंगे .


--डॉ.बच्चन पाठक 'सलिल',संपर्क- ०६५७/2370892

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