मंगलवार, 14 अगस्त 2012

गोवर्धन यादव का आलेख : राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के निर्माण की कहानी

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भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहरला नेहरू लाल किले की प्राचीर से ध्वज फ़हराते हुए

ऐसे बना राष्ट्रीय ध्वज बना तिरंगा

भारत का राष्ट्रीय ध्वज कई पड़ाव तय करने के बाद, अपने मौजूदा स्वरुप में आया है. इतिहास के पन्नों को पलटा जाए तो हम पाते हैं कि देश में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त सन 1906 को कलकत्ता ( अब कोलकाता) के परसे बेगान चौक( ग्रीन पार्क) में फ़हराया गया था. इस ध्वज मे लाल, पीले व हरे रंगों की आड़ी पट्टियां थीं. सबसे ऊपर स्थित लाल पट्टी में आठ कमल(सफ़ेद) के फ़ूल थे. पीली पट्टी पर हरे रंग मे देवनागरी लिपि में “ वंदे मातरम” अंकित था. हरी पट्टी में बाईं ओर सफ़ेद सूर्य तथा दाईं ओर सफ़ेद चाँद-सितारा था.

दूसरा राष्ट्रीय ध्वज 1907 ( एक अन्य मतानुसार 1905) में पेरिस में मदाम कामा ने फ़हराया था. यह पहले ध्वज से मिलता-जुलता था. फ़र्क सिर्फ़ यह था कि लाल पट्टी में आठ कमल के स्थान पर एक कमल तथा सात सितारे (सात ऋषियों के प्रतीक) थे. बर्लिन में समाजवादियों ने एक सम्मेलन में भी इस ध्वज का प्रदर्शन किया गया था. फ़िर 1917 में तीसरा राष्ट्रीय ध्वज फ़हराया गया. इसे होमरुल आंदोलन के दौरान ऎनी बेसेंट व लोकमान्य तिलक ने फ़हराया था. इस ध्वज में पांच लाल व चार हरी आडी पट्टियां एकांतर क्रम में थीं. इसके ऊपर सप्तऋषि के आकार में सात सितारे अंकित थे. बाईं ओर ऊपर के कोने में यूनियन जैक( ब्रिटेन का राष्ट्रीय ध्वज) था. एक कोने में सफ़ेद चन्द्रमा व सितारा भी था.

उस ध्वज में यूनियन जैक की मौजूदगी ब्रिटिश उपनिवेश का प्रतीक था, जो अनेक लोगों को स्वीकार्य नहीं था. अतः इस ध्वज के प्रति विरोध के स्वर उठने लगे. 1921 को महात्मा गांधी, कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लेने बेजवाडा( अब विजयवाडा) पहुँचे, तो पिंगले वैंकैया नामक युवक ने उन्हें नया ध्वज भेंट किया, इसमें दो रंग थे-केसरिया व हरा, जो देश के प्रमुख संप्रदायों का प्रतिनिधित्व करते थे. गांधीजी ने वैंकैया को सुझाव दिया कि उसमें सफ़ेद रंग की पट्टी जोड़ें, जो अन्य समुदाय का प्रतिनिधित्व करे और एक चरखा भी जोड़ें, जो प्रगति का प्रतीक हो. इस प्रकार परिवर्तित किए गए ध्वज को गांधीजी के आशीर्वाद से देश भर में व्यापक लोकप्रियता मिली.

सन 1931 के कराची कांग्रेस अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित कर उक्त तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज की मान्यता दी गई. इस अधिवेशन में यह स्पष्ट किया गया कि ध्वज के रंगों का कोई सांप्रदायिक महत्व नहीं है. केसरिया रंग वीरता व बलिदान का, सफ़ेद रंग सत्य व शांति का तथा हरा रंग विश्वास व शौर्य का प्रतीक माना गया. 22 जुलाई 1947 को पंडित जवाहरलाल नेहरु ने संविधान सभा में, जो राष्ट्रीय ध्वज पेश किया, उसमें एक परिवर्तन किया. वह यह कि बीच में नीले चरखे के बजाय नीला अशोक चक्र अंकित था. यह परिवर्तन इसलिए किया गया ताकि ध्वज दोनो ओर से एक जैसा दिखे. 15 अगस्त सन 1947 को देश आजाद हुआ और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले की प्राचीर से इसे फ़हराया था.

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गोवर्धन यादव

103 कावेरी नगर ,छिन्दवाडा,म.प्र. ४८०००१

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