गुरुवार, 16 अगस्त 2012

बच्चन पाठक सलिल की बाल कविता - भालू मामा

बाल-कविता

भालू मामा

bachhan pathak (Custom)

डॉ. बच्चन पाठक 'सलिल'


भालू मामा बड़े निराले
मधु पीकर रहते मतवाले
जहाँ देखते मधु का छत्ता
चढ़ें पेड़ पर , हिले न पत्ता |


करते मधु का काम तमाम
फिर सोते करते आराम
कभी नहीं वे मुह धोते थे
पड़े पड़े सोते रहते थे|


एक दिवस की सुनो कहानी
मामा ने सोने की ठानी
तब चीटों का आया दल
मामा को कटा, हुए विकल |


दौड़ नदी तीर पर आये
मामा जी-भर खूब नहाये
मामा के मन बात समायी
जग में अच्छी सदा सफाई |


संपर्क-- ०६५७-०२३७०८९२

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