शनिवार, 29 सितंबर 2012

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -95- राजीव सागरवाला की कहानी : बापू

कहानी बापू राजीव सागरवाला अर्से पहले एक सपना मैंने देखा था। ऐसा सपना था कि मेरे दिल ओ दिमाग पर असर कर गया। ऐसा कि अब तक मैं नहीं भुला पा...

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -94- वंदना सिंग की कहानी : न दैन्यं न पलायनं

न दैन्यं न पलायनं “ चित्रा !आज फ्री हो ?.....तुम्हारी बेटी तुमसे मिलना चाहती है” इरा ने फोन पर  बताया . “ओह नव्या !वो कब आई” मैनें पूछा त...

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -93- अनिता अतग्रेस की कहानी : " गीता हो या सीमा...कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता...."

"आ ज फिर तुम इतनी देर से आई गीता? तुम्हारी तो रोज़ की यही आदत हो गयी है, मैं बोल-बोल कर थक गयी ! अब तो मुझे भी टोकने में शर्म आने लगी ...

राजीव आनंद का आलेख - दलदली बुखार : मलेरिया

प्र त्‍येक वर्ष विश्‍व में 7.80 लाख लोग दलदली बुखार यानि मलेरिया से मरते हैं। भारत में लगभग 2.5 लाख लोग और झारखंड़ में लगभग 15 हजार लोग हर व...

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -92- राजीव सागरवाला की कहानी : मां अब....

कहानी मां अब.......  राजीव सागरवाला       उसने एक आफ व्हाईट मटमैले थैले से, जिसका रंग यक़ीनन कभी सफेद रहा होगा एक प्लास्टिक का आयताकार ड...

रजनी नैय्यर मल्होत्रा की कहानी - वेदना

सौरभ आज मानवी की तस्वीर लिए ऐसे फफक कर रो रहा जैसे उसने मानवी को अपनी दुनिया से नहीं इस दुनिया से खो दिया हो। सौरभ और मानवी का विवाह परिवार...

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की बाल रचना - (बिजली के) खंभे चाचा की पाती

बच्चों के नाम खंभे चाचा की प्यार भरी पाती प्यारे बच्चों आपके खंभे चाचा का आप सब बच्चों को प्यार भरा नमस्कार बच्चों आपने अनुभव किया होगा कि ...

प्रभुदयाल श्रीवास्तव का बाल साहित्य पर आलेख - बाल‌ विकास में परिवार की दैनिक चर्या की भूमिका

आ जकल बाल साहित्य और बाल विकास के चर्चे जोरों पर हैं। वैश्वीकरण के इस दौर मे जहाँ सारे विश्व में पश्चिम का बोलबाल है भारत भी इसकी मार से अ...

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -91- देवी नागरानी की कहानी : ऐसा भी होता है

कहानी ऐसा भी होता है देवी नागरानी कहाँ गई होगी वह? यूं तो पहले कभी न हुआ कि वह निर्धारित समय पर न लौटी हो। अगर कभी कोई कारण बन भी जाता त...

शुक्रवार, 28 सितंबर 2012

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -90- रमाकंत बडारया ‘‘बेताब'' की कहानी : जैसा पेड़ वैसा फल

कहानी जैसा पेड़ वैसा फल रमाकंत बडारया ‘‘बेताब'' प्रस्‍तावना ः प्रस्‍तुत मंचीय, नुक्कड़ नाटक शैली की कहानी 'जैसा पेड़ वैसा फल...

----

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------