रविवार, 9 सितंबर 2012

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -80- कैस जौनपुरी की कहानी : बहू मायके गई है...

कहानी

कैस जौनपुरी

बहू मायके गई है...

ये कहानी एक नई-नवेली दुल्हन संजू की है. जिसकी शादी एक ऐसे लड़के से होती है जो पति के नाम पर धब्बा साबित हुआ. संजू के पास कहने को सबकुछ था मगर सच कहें तो उसके पास कुछ भी नहीं था. एक दुल्हन को जो चीज सबसे पहले चाहिए थी बस वही नहीं थी. संजू का पति सुधीर एक निठल्ला आदमी था. लुंगी पहन कर घर में पड़ा रहता था. कुछ काम-धाम नहीं करता था. बाप की पेंशन पर घर का खर्च चलता था.

संजू के सास-ससुर खुश थे की अब बहु आ गई है तो उनका निकम्मा बेटा भी सुधर जाएगा. मगर सुधीर में कोई सुधार नहीं हुआ. बल्कि वो और अधिक आलसी हो गया.

संजू को घर का सारा काम अकेले करना पड़ता था. उस पर से भैंस की तरह मोटी सास अपने हाथ-पैर अलग से दबवाती थी. दोपहर में सिर पे तेल रखवा कर मालिश करवाती थी. संजू पहले सास के सिर पर तेल रखती थी फिर अपने पति सुधीर की भी मालिश करती थी. ये सब संजू एक दुल्हन की तरह सज-बज कर करती थी क्योंकि वो एक नई-नवेली दुल्हन जो थी.

धीरे ससुर भी अपना सिर दबवाने लगा. दिन भर की थकान के बाद जब संजू अपने बिस्तर पर पहुंचती थी तो वहाँ उसका पति सुधीर उसका इन्तजार कर रहा होता था. जो दो मिनट में ही एक मरे हुए मेढक की तरह संजू के शरीर पर फ़ैल जाता था.

संजू की जिंदगी नरक बन चुकी थी. जब संजू के घर से फोन आता तो उसके सास-ससुर “सब ठीक है...” कहकर बात को दूसरी तरफ घुमा देते थे और जब फोन संजू को दिया जाता था तब दोनों सास-ससुर वहीं खड़े हो जाते थे ताकि संजू अपने घरवालों से सच न बता दे की उसे यहाँ कितनी तकलीफ हो रही थी.

संजू भी सबकुछ एक आदर्श बहु की तरह झेल रही थी. कुछ दिन बाद संजू के घर वाले उसे लेने के लिए आये. और संजू कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई.

इसके बाद, इधर संजू की ससुराल में कोहराम मच गया. अब घर का सारा काम कौन करेगा? घर के तीन प्राणी आपस में इस तरह लड़ते थे जैसे तीन देश हों. शरीर से ज्यादा ताकतवर होने की वजह से सुधीर की माँ, बाप और बेटे दोनों पर हावी रहती थी.

मगर तब उन्हें संजू की बहुत याद आती थी. अब ये लोग संजू के आने का इंतज़ार करने लगे. मगर संजू ने आने से मना कर दिया.

संजू की सास ने तबियत खराब होने का बहाना करके बिस्तर पकड़ लिया. संजू के ससुर ने अपनी बीवी की जिंदगी और सुधीर की माँ का हवाला देकर संजू के घर वालों पर दबाव डाला और संजू को मजबूरन फिर उसी नरक में आना पड़ा जहाँ दुनिया की नजर में उसके पास सबकुछ था मगर हकीकत में उसकी जिंदगी एक जहन्नुम के जैसे थी जिसमें संजू कैद होकर रह गई थी.

इधर संजू के आते ही फिर से सब कुछ पहले जैसा हो गया. कोई एक गिलास पानी भी खुद से नहीं लेना चाहता था. क्योंकि संजू वापस जो आ गई थी. अब संजू अपने फिर से अपने मायके जाने का इंतज़ार करने लगी थी.

कैस जौनपुरी

qaisjaunpuri@gmail.com

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