सोमवार, 17 सितंबर 2012

रेखा जोशी की लघुकथा - भार्या तुम्हारी

image

''मैं तुम्हारी भार्या हूँ और रिश्वत के इस पैसे को मैं अपने घर में हरगिज़ खर्च नहीं करूँगी ,''सीमा ने राजेश से कहा। दोनों के बीच में कल रात से ही झगड़ा चल रहा था ,मुद्दा वही उपर की आमदनी का ,जिसे वह अपने घर में कदापि भी खर्च करना नहीं चाहती थी। राजेश ने अपनी पत्नी को पैसे की अहमियत के बारे में बहुत समझाया और बताया कि उसके दफ्तर में सब मिल बाँट कर खाते हैं लेकिन सीमा के लिए रिश्वत तो पाप कि कमाई थी , राजेश के लाख समझाने पर भी जब वह नहीं मानी तो गुस्से में उसने सीमा से साफ़ साफ़ कह दिया था कि अगर उसने इस मुद्दे पर और बहस की तो वह उससे सदा के लिए सम्बन्ध विच्छेद कर लेगा ,बात बढ़ती देख सीमा चुप हो गई और मेज़ पर रखा हजार का नोट उठा कर उसे एक लिफाफे में डाल कर अपने घर में बने छोटे से मंदिर में रख दिया और से रसोई में व्यस्त हो गई। तभी उसे बाहर आंगन में माली की आवाज़ सुनाई दी ,जो राजेश से कुछ दिनों की छुट्टी मांग रहा था और उसे अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए कुछ रुपयों की जरूरत थी ,सीमा ने झट से अपने मंदिर से वह लिफाफा उठाया और माली के हाथ में थमा दिया।

 

रेखा जोशी

फरीदाबाद

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------