रविवार, 23 सितंबर 2012

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की दो बाल कथाएं - बदला, बहुरूपिया

बदला


मच्छर परिवार बहुत परेशान था। दिन पर दिन मँहगाई बढ़ती जा रही थी और परिवार के सब प्राणी अब तक बेरोजकार थे। आखिर मांग मांग तक कब तक गाड़ी खिचती। फिर कोई कब तक किसी को देता रहेगा। मच्छरी ने अपने पति को सलाह दी कि "क्यों न कोई धंधा चालू कर दिया जाये ,बैठे बैठे कौन खिलायेगा। बच्चे भी बड़े हो रहे हैं। दस बच्चों को मिलाकर हम लोग बारह लोग हैं,धंधा करेंगे तो घर के सब लोग ही व्यापार संभाल लेंगे और नौकरों की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। "


"सलाह तो तुम्हारी उचित है परंतु कौन सा धंधा करें,धंधे में पूँजी लगती है जो हमारे पास है नहीं। मच्छर बोला।


"ऐसे बहुत से धंधे हैं जिसमे थोड़े सी पूँजी में ही काम चल जाता है। क्यों न हम पान की दुकान खोल लें। पूंजी भी नहीं लगेगी। सुबह थोक सामान ले आयेंगे और शाम को बिक्री में से उधारी चुका देंगे"मच्छरी ने तरीका सुझाया।


"मगर क्या गारंटी की दुकान चल ही जायेगी?"मच्छर बोला।


हम लोग पान के साथ तंबाकू ,गुटका किमाम इत्यादि सब सामान रखेंगे, इन वस्तुओं की बहुत डिमांड है,बिक्री तो होगी ही" मच्छरी बोली। "


"बात तो सही कह रही हो। कल से दुकान प्रारंभ कर देते हैं" इतना कहकर वह बाज़ार से दुकान का सब सामान आवश्यकतानुसार ले आया। दुकान चालू कर दी गई। वह और उसकी पत्नी दुकान पर बैठते। बच्चे भी बैठने लगे। बढ़िया पान लगते ,तंबाकू और गुटखों के पेकिट बनते और देखते ही देखते दुकान का सारा सामान बिक जाता। मजे से खर्च चलने लगा। एक दिन मच्छर ने महसूस किया कि उसके बच्चे दिन भर खांसते रहते हैं और कमजोर होते जा रहे हैं। उसने कारण जानने कि कोशिश की तो मालूम पड़ा कि बच्चे जब भी दुकान पर बैठते हैं ,लगातार तंबाकू और गुटखा खाते रहते हैं। मच्छर परेशान हो गया। बच्चों को समझाया कि बेटे यह तंबाकू बहुत हानिकारक होती है, अधिक खाने से जान भी जा सकती है। किंतु बच्चे नहीं माने। ग्राहक आते खुद तो पान तंबाकू खाते ही ,मच्छर पुत्रों को भी प्रेरित करते। आखिरकार एक एक कर मच्छर के दसों पुत्र स्वर्गवासी हो गये। मच्छर ने गुस्से के मारे दुकान बंद कर दी। आखिर उसके बच्चों की मृत्यु के जबाबदार इंसान ही तो थे क्योंकि उनकी प्रेरणा से ही भोले भाले बच्चे तंबाकू खाना सीखे थे ऐसा सोचकर मच्छर ने खुले आम घोषणा कर दी कि आगे से मच्छर‌ अपने परिवार के व अपने पालन पोषण के लिये कोई काम नहीं करेंगे सिर्फ आदमियों का खून चूसेंगे। जब से आज तक मच्छर इंसानों का खून चूस रहा है।

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बहुरूपिया


लाला पीतांबरलाल धरमपुरा रियासत के वैसे ही धुरंधर बुद्धिमान और हाज़िर जवाब विद्वान थे जैसे कि अकबर के दरबार में बीरबल और कृष्णदेवराय के दरवार में तेनालीराम। उनकी तुलना नाना फड़नवीस से भी की जा सकती है। रियासत के राजा शिवपाल बड़े ही धार्मिक प्रवृत्ति के राजा थे। याचक को यथा शक्ति दान देना उनके कर्तव्य में शुमार था। किसी को वे निराश अपने दरवार से वापिस नहीं जाने देते थे।
एक आर एक गरीब सा दिखने वाला आदमी दरवार में आया और कहने लगा मुझे खाना चाहिये। राजा ने अपने सिपाही से कहा कि इसे राज भोजनालय में ले जाकर खाना खिलवा दें। वह व्यक्ति बोला "राजन मैं ऐसा खाना नहीं खाता,मुझे अपने देश का ही खाना चाहिये।


"आप किस देश से पधारे कृपया बताने का कष्ट कर्रॆं। "राजा ने पूछा।


"यह में आपको नहीं बताऊंगा,यह तो आपको मालूम करना है। "वह व्यक्ति रहस्यमय लग रहा था। उस दिन उसने भोजन न‌हीं किया और राजकीय विश्राम गृह में भूखा ही सो गया। उसके हाव भाव और रहन सहन से यह पता लगाना संभव नहीं था कि वह कहां से आया है। वह बहुत सी भाषायें जानता था। कपड़ों के नाम पर एक लंबा चोंगा पहने था, जो गले से पैरों तक सारे शरीर को ढके था। एक दिन और बीत गया। राजा शिवपाल परेशान, दरबार में एक संत सा दिखने वाला व्यक्ति भूखा पड़ा है और वह उसे भोजन‌ भी नहीं करा पा रहे थे।


लाला पींतांबर लाल को इस बात का पता चला तो कहने आज इस बात का पता लगा कर ही रहूंगा कि यह आदमी कौन है। आधी रात बीत जाने के बाद लालाजी ने अपने घर से एक नंगी तलवार उठाई और दो सिपाहियॊं को लेकर विश्राम गृह जा पहुँचे जहाँ वह आदमी सो रहा था। सिपाहियों को कुछ निर्देश देकर वे कमरे के अंदर गये और सोते हुये उस व्यक्ति की छाती पर चढ़ बैठे और नंगी तलवार उसकी गर्दन पर रख
कर नोक जोरों से दबा दी। इस अप्रत्याशित कार्यवाई से वह् आदमी घबरा गया और 'बाप रे मार डाला बचाओ बचाओ' चिल्लाने लगा। लालाजी ने समझ लिया कि यह आसपास के क्षेत्र का कोई धूर्त है,उसकी गरदन दबोच दी और‌ बाहर खड़े सैनिकों को बुलाकर उनके हवाले कर दिया। उसे दिन के समय दरबार में पेश किया गया तो मालूम पड़ा कि वह पड़ोसी राजा के द्वारा भेजा गया जासूस था। लालाजी की सूझ बूझ से वह पकड़ा गया। उसे जेल में डाल दिया और लालाजी की सूझ बूझ के लिये राजा साहब ने उन्हें धन्यवाद दिया।

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  1. सुन्दर कहानियाँ ... मच्छरवाली कहानी अच्छा सन्देश प्रस्तुत करती हैं. धन्यवाद. हद (हर्षद दवे)

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेनामी11:50 pm

    Thanks for comments
    Prabhudayala Shrivastava

    उत्तर देंहटाएं

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