सोमवार, 17 सितंबर 2012

अमरीक सिंह कंडा की लघुकथाएँ - सोच का गतिरोध व जुड़वाँ

कंडे का कंडा

 

सोच का गतिरोध

‘‘पांच नम्बर वाली के साथ कौन है?’’ नर्स ने पूछा।
‘‘मैं हूं पांच नम्बर वाली के साथ, क्या हुआ बहू को?’’ एक 50-55 वर्ष की औरत ने पूछा।
‘‘लड़की हुई है मां जी।’’ नर्स ने कहा
इतनी बात सुनते ही सास बेहोश होकर फर्श पर गिर पड़ी। जल्दी-जल्दी नर्सों ने उसे उठाया और लेडी डाक्टर को आवाज लगाई। लेडी डाक्टर ने पूछा,‘‘ यह महिला कौन है? यह किसके साथ आई है?’’
‘‘मैडम यह पांच नम्बर वाली पेशेंट के साथ है।’’ नर्स ने कहा।
‘‘अच्छा जिसके लड़का हुआ है?’’ लेडी डाक्टर ने पूछा।
इतना कहने की देर थी कि सास उठ कर खड़ी हो गई। नर्सें मन ही मन हंस रही थीं।
‘‘मां जी पोते की बधाई हो।’’ लेडी डाक्टर ने कहा।
‘‘बधाई जी, बधाई। आपकी नर्सें तो कहती थीं लड़की हुई है। पागलों ने मेरी तो जान ही निकाल दी थी। इस तरह के मजाक नहीं करते।’’ सास बोली थी।
 

जुड़़वाँ

‘‘पहले ही दो लड़कियाँ हो चुकी हैं, फिर उलटी कर रही हो। चलो मेरे साथ अस्पताल डाक्टर को दिखा कर आते हैं। यदि लड़की हुई तो कोई जरूरत नहीं, समझी कि नहीं?’’ सास ने डराते तथा समझाते हुए अपनी बहू से कहा।
‘‘बधाई हो जी, दो बच्चे हैं एक लड़का तथा एक लड़की। थोड़ा ध्यान रखना पड़ेगा।’’ डाक्टर ने स्कैन करने के बाद बताया।
‘‘आपको भी बधाई डाक्टर साहब। चल बेटी घर चलें। सीढ़ियाँ ध्यान से उतरना। भगवान का लाख-लाख शुक्र है।’’ सास ने एक ही सांस में कहा।
बहू भी मन ही मन आने वाले लड़के का धन्यवाद कर रही थी कि उसने उसकी बेटी तथा अपनी बहन की जान बचा ली थी।















0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

और दिलचस्प, मनोरंजक रचनाएँ पढ़ें-

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------