शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

विजय वर्मा का लोकगीत : एक वृद्धा की व्यथा

छपरा, कार्यालय संवाददाता : एसपी साहेब! हम सतुई पिअत रई तबे उ हमार गठरी लेके भाग गईल। हमार गठरी दिलाई। बुधवार को 80 वर्षीय एक वृद्धा सारण के पुलिस कप्तान सुजीत कुमार के पास पहुंची और यही गुहार लगाई। 

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ऐ एस.पी .साहेब,  हमार गठरी दिलाई.

 

गठरी में रहे आटा,चाउर आउर भूंजा, 

पोता-पोतियन खातिर ओमे रहे खरबूजा

मालिक के रहे ओमे खाँसी के दवाई.

ऐ एस.पी.साहेब,हमार गठरी दिलाई.

 

आउर तनी सुनी, सुनी एगो बतिआ

गठरी के पीछे लागल रहे रमरतिया.

रमरतिया हिय रामसरन के लुगाई.

ऐ एस.पी.साहेब,हमार गठरी दिलाई

 

हम इहाँ आइल रहनी मिले एस.डी.ओ.से

गते-गते चल अइनी आपन गोर के भरोसे.

रिक्शा-टमटम के भाड़ा कहाँ से जुटाई

ऐ एस.पी.साहेब,हमार गठरी दिलाई.

 

ओही गठरी लेके गइल रहनी समधिआना,

उहे लेके मालिक करत रहले आना-जाना.

ओकरे बिन अब  दिन हम कईसे  बिताई.

ऐ एस.पी. साहेब,हमार गठरी दिलाई.

 

लाल रंग के छींटदार  रहे हमार गठरी,

दुल्हिन के  घर से ओमे मिलल रहे मठरी.

लड्डू,बुनिया,गाज़ा खाजा आउर मिठाई.

ऐ एस.पी. साहेब ,हमार गठरी दिलाई.

 

ठेला पर धर के हम पिअत रहनी सतुई,

गठरी उठा के चट से भागल उ बतुही,

दौड़नी हम पकड़े,बाकी काहाँ तक जाई.

ऐ एस.पी. साहेब,हमार गठरी दिलाई.

 

हम ओके चिन्ह तानी बड़ा हिय खट्चालू

मुखिया के खेत से चोरावत रहे आलू.

कहिओ न कहिओ  उ    केहू से कुटाई.

ऐ एस.पी. साहेब,हमार गठरी दिलाई.

 

उ रमरतिया अजायबगंज में रहेले,

अपना के ग्राम-सेवक के नाता में कहेले.

हाली-हाली कुछ करीं,ना ता उ ना धराई

ऐ एस.पी. साहेब,हमार गठरी दिलाई.

 

अब आखिरी विनती तनी सुन लिही हमार,

जल्दी से भेजीं कवनो दरोगा इमानदार,

ना त ई बुढ़िया के जान एही जागा जाई.

ऐ एस.पी. साहेब, हमार गठरी दिलाई.  .

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ओमे=उसमे,बतिआ =बात,गते-गते=धीरे-धीरे,गोर=पैर ,बतुही=बात बनानेवाली ,कुटाई=पिटाई खाएगी,

हाली-हाली=जल्दी-जल्दी

. ..

v k verma,sr.chemist,D.V.C.,BTPS

BOKARO THERMAL,BOKARO
vijayvermavijay560@gmail.com

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  1. गाँव में ही हमारी आत्मा रची बसी है यूँ तो ये ब्यथा है... पर इतनी भाव प्रवण कि खो गया इसमें अंतर तक...वाह बेहद सुन्दर माटी की सोंधी सुगंध.....

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. bahut sundar ! gaon gharan ke ehi hal ba | jon desh me imandari kitabi bat bhayil nu, uu desh me ab ashanti loot khashot e rahi aur kuchho na| rouwa geet jiyara jura delas|
    manoj kumar pathak

    उत्तर देंहटाएं
  4. Dhanyawaad manoj kumar pathak ji.80 saal ke dadi me ke dookh se kehu pareshaan ho sakela.

    उत्तर देंहटाएं

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