मोहसिन खान की कविता

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हमारी प्यारी हिन्दी !

भारत माता के मस्तक की बिन्दी,

जन-जन की भाषा, हमारी प्यारी हिन्दी ।

पूरब-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण सबको करे समन्वित,

मानव को मानव से जोड़े, सबकी कराए सन्धि ।

हमारी प्यारी हिन्दी !

धर्म, जाति, ऊंच-नीच, रंग, भेद से है परे,

सरल, सहज, सुगम इसमें नहीं जकड़बन्दी ।

हमारी प्यारी हिन्दी !

 

-डॉ. मोहसिन खा़न

सहायक प्राध्यापक हिन्दी

जे.एस.एम. महाविद्यालय,

अलिबाग़

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