गुरुवार, 27 सितंबर 2012

पुस्तक समीक्षा : "संवेदना भरे दिल के पारदर्शी अस्तित्व का चित्र”

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"संवेदना भरे दिल के पारदर्शी अस्तित्व का चित्र

कविता संग्रह - साँसों के हस्ताक्षर

लेखिका - डॉ. अनीता कपूर

कविता कुछ और नहीं मन की भावनाओं को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। संगीत की तरह कविता भी हर हर भाषा की तर्जुमानी है। हिन्दी कवि जगत के प्रख्यात कलमकार डॉ विजेंद्र नारायण के शब्दों में, "कविता संघर्ष होती है, कविता प्रतिरोधी होती है, जहां प्रतिरोध या संघर्ष नहीं, वहाँ सिर्फ कला है कविता नहीं!" रचना रचनाकार का परिचय होती है, जब उसकी सोच की उड़ान में कल्पना और यथार्थ दोनों शामिल होते हैं, तो वह खुद को किसी बंधन में नहीं बांध पाती, स्वभावानुसार कला की मानिंद शिल्प और सौन्दर्य से अपने आप को ज़ाहिर करती है। इसी विचारधारा के साथ आज़ाद फिज़ाओं को तलाशती यू॰ एस॰ ए की जानी मानी कवयित्री डॉ अनिता कपूर, जो प्रवासी भारतीय साहित्य में भी अपनी दक्षता पा रही हैं, अपने इस पांचवें काव्य-संग्रह, "साँसों के हस्ताक्षर", में अपना परिचय देते हुए आत्मकथ्य में लिखती हैं--"कविता मेरे अंदर खुलने वाली खिड़की रही, जिसके आर-पार झाँककर मैंने भीतर-बाहर की दुनिया को देखा, परखा, समझा और कागजों पर शब्दों के द्वारा खुद को जोड़ा.....और फिर चल पड़ी एक नयी सुबह की तरफ"। उनकी कविता ‘खिड़कियाँ’ उनके पारदर्शी भावनाओं का एक ऐसा रौशनदान है जहां से रह-रह कर उनके अतीत के नशीले आसमान पर लफ्जों के रँगीले सितारे टंके दिखाई पड़ते हैं, लफ्जों के झाड़ उगे हुए सामने लहलहाते हैं और जिंदगी की सड़क पर सफर करते करते अपने जिये हुए पलों की पोटली से कुछ मीठी-कड़वी यादों से रिहाई पाने की ललक से, मन के वाद-विवाद की कैद तोड़ना चाहती है, आजादी का माहौल चाहती है! कहीं तो लगता है, शब्द हमसे बतिया रहे हैं, अपने विस्तार की मांग कर रहें है, लम्हों के हस्ताक्षर खुद का एक नया इतिहास रचना चाहते हैं, जैसे प्रकृति की हर संभावना को अपने भीतर की विराटता में शामिल करना चाहते हों:-

“आओ/ अंकित कर दें/

हर पल पर/ अपनी साँसों के हस्ताक्षर

अनिता जी की रचनात्मक शैली, शिल्प, मुहावरेदार भाषा तथा अभिव्यक्ति का सौन्दर्य देखते ही बनता है, वह कुछ भी आधा- अधूरा नहीं चाहती, शायद बीते पल उससे बहुत कुछ छीन ले गए हैं, और आने वाले जीवन के लिए वह पूरा का पूरा खुला आसमान तलाश रही हैं, देखें उनकी आशाओं का ताजमहल:-

“इसीलिए/कुछ स्वार्थी हूँ मैं

उम्र को कैद कर लेना चाहती हूँ

आदमी आदमी को कमज़ोर समझे, यह उसकी नादानी है। चुप्पी की तहों मे भी कभी एक आंदोलित ज्वालामुखी होता है। ऐसा मनुष्य खुराक के नाम पर सिर्फ ‘आग’ गृहण करता है, उसके भीतर एक जंगल होता है, इन्हीं तेवरों को प्रत्यक्ष रूप में उनकी बानगी में देखें:-

“और, आत्मनिर्णय के

संकटापन्न क्षणों में

उग आते हैं मस्तिष्क में

नागफ़नी के कांटें

काव्य के आस्वाद के साथ उनके मन की उमड़ती आंदोलित ज्वालामुखी की गहराई को छू पाना या मापना संभवता की हदों से दूर लग रहा है। वे अपने भीतर के क़लमकार की अहसासहारी और जीवन की हक़ीक़त, इंसान की अंतरआत्मा का दर्द, उसकी छटपटाहट को निहायत ही पुरअशर शब्दों में सामने दरपेश कर पाई हैं। बहुत ही सहज सरल भाषा में सोच नुमाया हुई है। सच कहा है किसी शायर ने—“कवि के बिना शब्द तो हो सकते हैं, पर शब्द बिना कवि नहीं होता”। अनिता जी के पास अहसासों को जुबां देने की कला है जो शब्दों के सुर-ताल पर रचनाओं का क्षृंगार करती है।

प्रोफेसर रमेश तिवारी विराम ने बखूबी लिखा है—“शब्द बांस समान होते हैं, बांस से लाठी भी बनती है और बांसुरी भी.......!!” कवि हृदय जब भावनाओं को व्यक्त करता है तब शब्द बांसुरी बन जाते है और वही शब्द जब समाज की कुरीतियों पर प्रहार करते हैं तो लाठी बन जाते हैं”।

अपनी हस्ताक्षर रचना “नया आकाश” में अनिता जी इस संग्रह “साँसों के हस्ताक्षर” में अपनी ईमानदार सोच हमारे सामने रखते हुए कहती है—

“आज/ मैं खुद को समेटने लगी हूँ

मैंने नया आकाश तराशने के लिए

एक नई औरत को आमंत्रण दिया है...

सांस सांस के साथ सोच के नए ताने-बाने बुनने वाली रचनाकर अनीता कपूर को अपने सपनों का खुला आसमाँ मिले, जहां वह सोच की कफ़स के बाहर आकार कुछ नया, और नया साहित्य हम तक पहुंचा सके। शउभकमनाओं सहित

संग्रह: “साँसों के हस्ताक्षर”, लेखिका: डॉ अनिता कपूर, पृष्ठ: 152, मूल्य: 250, प्रकाशक: अयन प्रकाशन, नई दिल्ली-110030

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समीक्षक:

clip_image006 देवी नागरानी

पता: ९-डी॰ कॉर्नर व्यू सोसाइटी, १५/ ३३ रोड, बांद्रा , मुंबई ४०००५०

3 blogger-facebook:

  1. देवी नागरानी जी की समीक्षा बहुत नपी -तुली है। कविताओं की गहनता की पड़ताल की गई है ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया समीक्षा है | बधाई |

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेनामी12:46 am

    Sameeksha Santulit hai,Badhai.

    Meethesh Nirmohi.

    उत्तर देंहटाएं

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