चंद्रेश कुमार छतलानी की कविता - प्रभु ना निहार मेरी ओर - मेरी प्रार्थना

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प्रभु ना निहार मेरी ओर - मेरी प्रार्थना

प्रभु ना निहार मेरी ओर

मैं छुपाना चाहता हूँ तुझसे 

मेरे सारे आंसू - मेरे सारे दुःख ।

नहीं चाहता हूँ मचलना मैं 

किसी बच्चे की तरह 

न ही तेरी आँखों की ममता 

देख के पा लूंगा मैं सारे सुख।

मैं छुपाना चाहता हूँ तुझसे 

मेरे सारे आंसू - मेरे सारे दुःख ।

तू भले ही व्याप्त हो हर ओर हर जगह 

मेरा तो लेकिन कोई अस्तित्व ही नहीं 

हर तत्व में तेरा ही अंश बसा है 

मुझसे ही रह गया प्रभु तू चुक ।

मैं छुपाना चाहता हूँ तुझसे 

मेरे सारे आंसू - मेरे सारे दुःख ।

अगर देखना है तो मेरे दिल में देखना 

ज़ंजीर से बंधा हुआ हर भाव दिखेगा 

तेरे बेबस अंशों को तू ना देख पायेगा 

निगाहें ना रह जाएँ कहीं तेरी यहीं रुक ।

मैं छुपाना चाहता हूँ तुझसे 

मेरे सारे आंसू - मेरे सारे दुःख ।

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Chandresh Kumar Chhatlani

http://chandreshkumar.wetpaint.com

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