शनिवार, 20 अक्तूबर 2012

चंद्रेश कुमार छतलानी की कविता : यादें उलझी सी

image

कुछ उग चुके कांटे जब मुझे बहुत तड़पाते हैं
पलकों के ठिकाने पे अपने दर्द को पहुंचाते हैं।

मैं तब यह राज़ जान कर ठगा सा रह जाता हूँ
ज़ख्म यादों के परों पे आकाश को चले जाते हैं।

कभी यादें मंझधार, कभी खुद किनारा होती हैं
राह में गिराती हैं, कभी सबका सहारा होती हैं ।

मैं आईने में खुद को जब सीधा खडा देखता हूँ
सारे अक्स मेरे यादों की हवा से लड़खड़ाते हैं ।
... ज़ख्म यादों के परों पे आकाश को चले जाते हैं।

यादें साज़ भी हैं, यादें ही संगीत, सुर औ राग हैं
यादें नज़रों का नूर भी है और चहरे के भी दाग हैं ।

मैं जब जानना चाहूँ इनको ये कुछ और हो जाती हैं
मेरे सारे हर्फ़ कैसे इस सागर में घुल जाते हैं ।
... ज़ख्म यादों के परों पे आकाश को चले जाते हैं।

---

चंद्रेश कुमार छतलानी

परिचय

जन्म - २९ जनवरी १९७४
जन्म स्थान  - उदयपुर (राजस्थान)

शिक्षा - एम. फिल. (कंप्यूटर विज्ञान), तकरीबन १०० प्रमाणपत्र (ब्रेनबेंच, स्वीडन से)
भाषा ज्ञान - हिंदी, अंग्रेजी, सिंधी

लेखन - पद्य, कविता, ग़ज़ल, गीत, कहानियाँ

पता - ३ प ४६, प्रभात नगर, सेक्टर - ५, हिरण मगरी, उदयपुर (राजस्थान)
फोन - ९९२८५ ४४७४९
ई-मेल - chandresh.chhatlani@gmail.com
यू आर एल - http://chandreshkumar.wetpaint.com

कार्य - १३ वर्षों से कंप्यूटर सोफ्टवेयर एवं वेबसाईट डवलपमेंट का कार्य
        अभी एक विश्वविद्यालय (जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ) में सहायक आचार्य (कंप्यूटर विज्ञान)

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------