रविवार, 21 अक्तूबर 2012

विनय कुमार सिंह की कविता - तस्वीर...

तस्वीर....

ऐ! तस्वीर क्या कर जाती है तू?
दिल में छुपे दर्द को उकेर जाती है तू
क्या रिश्ता है मेरा तुझसे?
किस बात पर गुरूर कर जाती है तू?
सुबह से शाम तक तेरा ही दीदार करता हूँ मैं
फिर भी ऐसी क्या खता है मेरी जो रूठ जाती है तू?
ऐ! तस्वीर क्या कर जाती है तू?

हर धुंधली शाम के बाद एक सुनहरे सुबह की याद छोड़ जाती है तू
यादों को बिखेरूं तो फिर एक बार दिख जाती है तू
लफ्जों में लहू बहाने पर मजबूर कर जाती है तू
कब तक कोसूं मैं आखिर तुझे
क्यों न इसे हक़ीकत बना जाती तू
ऐ! तस्वीर क्या कर जाती है तू?
 
राज को राज रहने दू, इस बात से दूर कर जाती तू
आखिर क्या हसरत है तेरी?
क्यों न कह जाती तू?
ऐ! तस्वीर क्या कर जाती है तू?

एक दिन सोचा तुझे भूल जाऊँ  मैं,
दिल को न आये याद तेरी, कुछ ऐसा कर जाऊँ  मैं,
सुबह से शाम हो गयी तुझे भुलाने की बुनियाद बनाने में
कुछ पल भी न लगा मुझे, तुझे मिटाने में
एक माचिस की तीली ने मिटा दिया तुझे
चंद लम्हे भी ना लगे, तेरी राख को ठिकाने लगाने में।
ऐ! तस्वीर क्या कर जाती है तू?
--

विनय कुमार सिंह

ग्राम- कबिलासपुर

पोस्‍ट- कबिलासपुर

कैमूर भभुआ

बिहार- 821105

vinaymedia.pratap11@gmail.com

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