शुक्रवार, 26 अक्तूबर 2012

कादम्बरी मेहरा का संस्मरण : हिन्दी-उर्दू का गठबंधन करने वाला रचनाकार

(तेजेंद्र शर्मा - जिन्होंने हाल ही में अपने जीवन के 60 वर्ष के पड़ाव को सार्थक और अनवरत सृजनशीलता के साथ पार किया है. उन्हें अनेकानेक बधाईयाँ व हार्दिक शुभकामनाएं - सं.)

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हिन्‍दी-उर्दू का गठबंधन करने वाला रचनाकार

कादम्‍बरी मेहरा

तेजेन्‍द्र से मेरा परिचय एक कार्यक्रम संयोजक के रूप में हुआ। वह स्‍वयं एक लेखक भी हैं यह बाद में जाना। लंदन में होने वाली अधिकांश साहित्‍यिक व सांस्‍कृतिक गतिविधियों को सुचारू रूप से दर्शकों के समय प्रस्‍तुत करने में आपका नाम सर्वोपरि है। आपके अपने शब्‍दों में- ‘मैं तो एक ट्रेन ड्राइवर हूँ जी...।

तो मैं यह कहूँगी कि लंदन में हिन्‍दी की ‘छुक-छुक' गाड़ी के विद्युतीकरण का श्रेय आपको मिलना चाहिये।

यह सही है कि तेजेन्‍द्र के मंच पर आने के काफी पहले से इंग्‍लैंड में हिन्‍दी भाषा में रचना कार्य चल रहा था। मगर कथालेखक जो वर्षों से लिख रहे थे आज भरपूर उजागर एवं प्रशस्‍त हैं। अब से एक दशक पहले उन्‍होंने वरिष्‍ठ पदों पर बैठकर भी अपने क्रियाकलापों से औरों को जोड़ने का कोई प्रयास नहीं किया। भारत में अनेकों बार छपने के

बावजूद वह ‘लाइम लाइट' में नहीं आये। अपने-अपने सीमित दायरे में लौरेल की पत्तियाँ बटोरते रहे। नव अंकुरित लेखकों को प्रोत्‍साहन एवं उनका मार्ग प्रदर्शन का कोई प्रयास - समवेत प्रयास मंच पर नहीं उभरा था।

पूरे इंग्‍लैंड में अनेकों हिन्‍दी संस्‍थाएँ उगीं और उन्‍होंने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया; परंतु उनका कार्यक्षेत्र आंचलिक रहा उनकी सदस्‍यता भौगोलिक सीमाओं से अवरुद्ध रही। इनकी तुलना में तेजेन्‍द्र की ‘कथा यू.के.' अधिक पुष्‍ट रही क्‍योंकि इसमें सभी लेखकों को - वरिष्‍ठ व नवीन, एक ‘चिड़िया की आँख', एक वेधबिंदु - अंग्रेजी में फोकल पौइंट' दिया। लेखकों के प्रयास में स्‍वचालित संचालन आया है या यूँ कहिये अपने सृजन को स्‍वयं उन्‍हीं ने पहचाना व व्‍यापक बनाया। इससे हिन्‍दी का क्षेत्रफल बढ़ा।

कथा यू.के. द्वारा लेखकों को दिये जाने वाले सम्‍मान - ‘इंदु शर्मा सम्‍मान' व ‘पद्‌मानंद साहित्‍य सम्‍मान' हिन्‍दी जगत की अमूल्‍य निधि हैं।

प्रतिवर्ष हम इनके सौजन्‍य से न केवल स्‍थानीय वरन्‌ भारत के भी सर्वश्रेष्‍ठ लेखकों/लेखिकाओं को जान पाते हैं।

कहानी लेखन की तकनीक, आधुनिक कहानी का स्‍वरूप आदि विधाओं पर गोष्‍ठियाँ तेजेन्‍द्र ने आयोजित कीं व लेखकों को हिन्‍दी में कम्‍प्‍यूटर का प्रयोग करने में भी मदद कीं। कक्षाएँ आयोजित कीं।

श्रेष्‍ठ लेखकों को लंदन की पृष्‍ठभूमि में एक प्रबुद्ध पाठक वर्ग के समक्ष प्रस्‍तुत करना और सम्‍मानित करना अपने आप में एक अपूर्व व सराहनीय उद्योग है। तेजेन्‍द्र ने तन-मन-धन से यह उद्यम किया है। वह इसके लिये प्रशंसा के पात्र हैं।

अपने निजी लेखन में उन्‍होंने हिन्‍दी और उर्दू के गठबंधन का प्रयास किया है व अपनी कहानियाँ स्‍वरबद्ध करवाई हैं। भारत के मूक बधिर शिष्‍यों एवं वृद्धों व अनपढ़ व्‍यक्‍तियों के लिये भी यह वरदान साबित होंगी।

अपनी मेहनत के लिये बधाई के पात्र हैं। लगे रहो तेजेन्‍द्र भाई!

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साभार-

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