मीनाक्षी भालेराव की कविताएँ व गीत

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पुणे की मेयर के साथ समानित होते हुए

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पिछली रात

पिछली रात मोहल्ले में हो गया हल्ला

हल्ला ओ हल्ला

किसी ने कहा चोर था

किसी ने कहा डाकू

मुझ को मालूम  था 

रात को आया

मेरा चित चोर था

हला ओ हल्ला

पिछली रात ---------------------------

 

सारी रात जगाया

क्या गजब ढाया

लेने ना दी अंगडाई भी

मेरे तनमन में हो गया

हल्ला ओ हल्ला

पिछली रात----------------------------

 

जाने लगा तो

ठोकर लगी और गिर पड़ा वो

घर के सब जागा उठे

अंगना मे फिर खूब हुआ

हल्ला ओ हल्ला

पिछली रात------------------------------

 

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जीवन आधार

देखो फिर बरस रही है बूंदे

जीवन का आधार लिए

तपती हुई धरती पर

शीतल फुहार लिए

आसमान आज फिर खड़ा है

अमृत कलश लिए

कुछ बूंदों को बांधे हुए

कुछ बूंदों को खोले हुए

हंसती हुई सुबह के सारे उल्लास लिए

मुरझाये खेतों को आधार  दिए

मुंडेर-मुंडेर बहती धारा

फूलों की सौगात लिए

गीत गाती, गोरियों

चेहरे की मुस्कान बने

बैलों के गले की रुनझुन के

सांझ की आवाज लिए

देखो फिर बरस रही है बूंदें

जीवन का आधार लिए

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माँ शारदे

माँ शारदे है सरस्वती

रागेश्वरी , भागेश्वरी

माँ-----------------------

वर दे वर दे वर दे

वीण के तारों सा मुझ को

स्वर दे स्वर दे स्वर दे

माँ-----------------------

वर दे वर दे वर दे

सात सुरों की

इस महिमा से

मन मोरा भर दे

भर दे भर दे भर  दे

माँ-----------------------

वर दे वर दे वर दे

जिसके गले में

तू बस  जाए

जीवन उस का तू त्र दे

तर दे तर दे तर दे

माँ-----------------------

 

 

हौसलों के साथ

चल कदम बढ़ाये जा

अपने हौसलों के साथ चल

मंजिलें कठिन  हैं तो क्या

मूड कर ना तू पीछे देख

आ रही हों चाहे कितनी सदा

रास्ते न तू बदल

मुश्किलों की घड़ी बीत जायेगी

चल  कदम बढ़ाये चल

अपने सपनों के साथ चल

पहाड़ों पर चढना है तो

अपनी रफ्तार और तेज कर

पर्वतों को पार कर

नदियों कस संग चल

चल कदम बढ़ाये चल

आसमान के द्वार भी

खुल जायेंगे तेरे वास्ते

आँधियों से ना डर

तूफानों से ना घबरा

चल कदम बढ़ाये चल

अपने कारवाँ के साथ चल

तेरी मशाल के साथ-साथ

हजारों मशालें और जले

चलना है तो ऐसा कल

वरना चलना बेकार है

चल कदम बढ़ाये चल

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