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रामदीन की कविता - क्या हैं हम

‘‘अर्धसत्‍य''

क्‍या हैं हम

सोची समझी नासमझी में घटना हो गई ट्विन टावर की।

मरे निरीह अभागे उस दिन थी बदकिस्‍मत ट्विन टावर की॥

 

तत्‍क्षण फुंफकारा अमरीका चारों तरफ ध्‍यान से देखा।

बैठ झरोखे उसने सोचा क्‍यों विश्‍वास खा गया धोखा॥

 

महज एक शक ही होने पर नोच लिया अफगानिस्‍तान।

एक एक गढ़ दहशत का जो खोद दिया अफगानिस्‍तान॥

 

अब तो बम की बात ही नहीं तेज पटाखा वहां गुनाह।

खोद जमी से दी फांसी मिटा पड़ोसी तानाशाह॥

 

शेर ढूँढने के चक्‍कर में ढूंढ-ढूंढ कर मारे चूहे।

एयरपोर्ट पर बढ़ी चौकसी बेगाने सब बन गये चूहे॥

 

किसी के जूते, किसी के चप्‍पल, किसी की चड्‌ढी खोलके देखी।

नंगा करके एक-एक को किया तमाशा दुनिया देखी॥

 

नहीं शर्म हमको है आती सभी पड़ोसी हमें सतायें।

कोई भेजे खुफिया सैनिक कोई जाली नोट चलाये॥

 

हथियारों का करें प्रदर्शन देश में घुसकर दुष्‍ट पड़ोसी।

नाक में दम भिखमंगे करते झेल रहे हम दुष्‍ट पड़ोसी॥

 

घुसपैठिये देश में सोयें, खायें, पियें और मजे उड़ाये।

कड़े कारगर कदम न लेकर हम दुनिया में हंसी उड़ाये॥

 

यहां वहां रोते फिरते हैं इसने हमको मारा है।

गद्‌दारों को मार भगाओ भारत देश हमारा है॥

 

अब तो शर्म करो आकाजी कुछ तो सीखो अमरीका से॥

अपनी सीमा करो सुरक्षित कुछ तो सीखो अमरीका से

 

किसका डर है किसी दहशत देश हमारे साथ है।

लगता है कुछ नादानी वश तंग हमारा हाथ है॥

 

करगिल, संसद, मुम्‍बई, सरहद सब कुछ है, अब आगे।

हमीं भुलक्‍कड़ कुछ ना करते दुनियाभर में भागे॥

 

--

-रामदीन,

जे-431, इन्‍द्रलोक कालोनी,

कृष्‍णानगर, लखनऊ-23

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बेनामी

हमीं भुलक्‍कड़ कल्पना जरुरतों का मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न पहलूओं पर युवाओं को राष्ट्रीय प्रतिनिधियों से बौध्दिक चर्चा-परिचर्चाके द्वारा अमरीका से सबक सीख़े औऱ ऱामदीऩ की कबिता का॑ सच कऱॅ
पंकज शमा॔

बेनामी

हमीं भुलक्‍कड़ कल्पना जरुरतों का मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न पहलूओं पर युवाओं को राष्ट्रीय प्रतिनिधियों से बौध्दिक चर्चा-परिचर्चाके द्वारा अमरीका से सबक सीख़े औऱ ऱामदीऩ की कबिता का॑ सच कऱॅ
पंकज शमा॔

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