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राजीव आनंद की लघुकथा - खुशखबरी

खुशखबरी

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मधुमेह से जीवन बढ़ जाता है, ये कहना था रविन्‍द्र बाबू का। रविन्‍द्र बाबू बड़े ही मस्‍तमौला किस्‍म के व्‍यक्‍ति थे। बाइपास सर्जरी भी करवा लिया था और जीवन के 70वें पड़ाव पर मस्‍त थे। लक्ष्‍मणपुर गांव के मुखिया रह चुके रविन्‍द्र बाबू को गांव में सभी मुखिया जी कहता था। विनय उनका पड़ोसी था और अपने पिता के हाल में हुए मधुमेह के कारण रविन्‍द्र बाबू से मिलता रहता था।

विनय रविन्‍द्र बाबू से एक दिन चौपाल में बैठा देखकर पूछा अच्‍छा चाचा आपको मधुमेह कब हुआ, रविन्‍द्र बाबू ने तपाक से कहा कि मधुमेह मेरे साथ चालीस वर्षों से मेरा साथी बनकर है। तुम्‍हें जानकर आश्‍चर्य होगा विनय मधुमेह मेरे जीवन को बढ़ा दिया है।

वो कैसे चाचा, विनय ने उत्‍सुकता से जानना चाहा, वो ऐसे भतीजे जब हम जाने रहे कि हमका मधुमेह हो चुका है तो थोड़ा आश्‍चर्य हुआ था काहे कि हम सोचते रहे कि यह बीमारी हमका हो ही नहीं सकती इसलिए कि मीठा हम नहीं के बराबर ही खाते रहे और बर्जिश भी करते रहे पर बाद में चिंतन-मनन करे से पता चला कि यह हमका तनाव के कारण हुआ था। हम तो कहूंगा विनय आज तनाव से मधुमेह ज्‍यादा हो रहा है मीठा खाने से कम।

जीवन आपकी मधुमेह से कैसे बढ़ गयी चाचा, विनय ने उन्‍हें याद दिलाया, अरे हां विनय वे कहने लगे, अरे तू जानता है न उ मोहन का एक लंगोटिया यार रहा रूद्रा, जो अमरिका में अभी रहता है, हाँ-हाँ चाचा, विनय ने कहा, रूद्रा चाचा तो एक-दो बार गांव में भी आए हैं। हां तो वही रूद्रा इत्‍तफाक से गांव आया हुआ था जब पता चला कि ये ससुरी मधुमेह हमका हो गया है, तो हम रूद्रा को बताये रहे। रूद्रा हमको बताया रहा कि सुबह एक घंटा जल्‍दी-जल्‍दी टहलना और शाम को एक घंटा और खाने का कोटा बांध लेना, रविन्‍द्र बाबू कह रहे थे, कोटा मतलब समझा विनय, नहीं चाचा, जरा समझाओ न चाचा, रविन्‍द्र बाबू बोले कि जैसे एक पउवा आटा खाते हो न तो एक ही पउवा आटा रोज खाना है, न जरा कम और न जरा ज्‍यादा। इसी तरह खाने का सभी चीज में कोटा सिस्‍टम लागू करना है। रूद्रा यह भी बताया रहा कि अनुशासन से रहना होगा बस मधुमेह तुम्‍हरा दोस्‍त बन जाएगा।

इसका मतलब तो यह हुआ न चाचा, विनय आगे बोलने लगा कि मधुमेह फौजी की तरह अनुशासन में रहने वाला बीमारी है। रविन्‍द्र चाचा हंसने लगे और विनय के उदाहरण पर खुश होते हुए बोले तुम ठीक कहा विनय।

विनय अभी मधुमेह बीमारी से अनभिज्ञ था उसने रविन्‍द्र बाबू से पूछा कि इस बीमारी को डायबिटीज कहते है यह फौरेन का बीमारी लगता है चाचा। रविन्‍द्र चाचा बोले अरे नहीं भतीजे यह बीमारी जब हमका हो गया न तब हम भी इसका खोजबीन करना शुरू किए और तब अपना रामखेलावन है न अरे वही जिसका शहर मा किताब का अहढ़त है वही एक किताब ला कर दिया था इस बीमारी का,

नाम क्‍या था, चाचा, विनय ने पूछा, नाम तो अभी याद नहीं पर घर मा कितबवा पड़ी होगी, देगें भतीजे तुमको पढ़ने, विनय के किताब मांगने से पहले रविन्‍द्र बाबू ने उसे किताब देने का वादा भी कर दिया था।

विनय पूछा कि आप क्‍या पढ़े चाचा उस किताब में, अरे हम तो बहुत कुछ पढ़ा विनय, सबसे पहले भारत के ही डाक्‍टर, नाम याद करते हुए कहा कि हां नाम याद आया सुश्रुत, ईसा मसीह के जन्‍में के बहुतते दिन पहले इ बीमारी को खोज लिहिन थे और पेशाब में चीनी जाने के कारण जोन बीमारी होता है न, उसका नाम रखे मधुमेह। तो डायबिटीज इस बीमारी का नाम कौन रखा चाचा, विनय ने मुखिया जी से पूछा, उ तो ठीक से मालूम नहीं पर सुनने में आया कि अफलातून बाबा के देश में ही कोई इस बीमारी का नाम डायबिटीज रखा था।

मुखियाजी थोडा रूके और पूछा विनय तुम इ सब काहे जानना चाहता है रे, क्‍या तुमको......बीच में ही टोकते हुए विनय बोला मुझे नहीं चाचा, मेरे बाबूजी को पिछले सप्‍ताह ही डाक्‍टर ने कहा कि मधुमेह हो गया है। रविन्‍द्र बाबू बोले तब तो तुम्‍हारे बाबूजी राम लखन का उम्र बढ़ गया। विनय रविन्‍द्र बाबू से मिलने के पहले बहुत डर गया था कि इस असाध्‍य रोग से ग्रसित उसके बाबूजी का अब क्‍या होगा। रविन्‍द्र बाबू की बात सुनने के बाद उसे जान में जान आयी।

रविन्‍द्र बाबू विनय को गुमसुम देखकर बोले, चिंता का कोनो बात नहीं है विनय, जाकर अपने बाबूजी को बोल देव कि चाचा सुबह घूमने के लिए बुलाइन है, बाकी हम सब समझा देंगे। विनय को अब कुछ अच्‍छा लग रहा था और चालीस वर्षों से रविन्‍द्र बाबू को मधुमेह है यह जानकर अपने पिता की लंबी आयु की कामना करता हुआ अपने बाबूजी को खुशखबरी देने विनय घर की ओर चल पड़ा था।

राजीव आनंद

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