आलेख || कविता ||  कहानी ||  हास्य-व्यंग्य ||  लघुकथा || संस्मरण ||   बाल कथा || उपन्यास || 10,000+ उत्कृष्ट रचनाएँ. 1,000+ लेखक. प्रकाशनार्थ रचनाओं का  rachanakar@gmail.com पर स्वागत है

-------------------

मिलन चौरसिया की कविता - ये देश सलोना है

ये देश सलोना है, माटी का लोना है.
जिसने गूंथा जी भर के इसको गूंथा,
जिसने लूटा जी भर के इसको लूटा,
जबतक इसके टुकड़े टुकड़े काट ना लें,
जबतक इसके टुकड़े टुकड़े बाट ना लें,
इन नेताओं को चैन नहीं होना है.
ये देश सलोना है.

वोट बढ़े जिससे इनका, ऐसा कानून बनाते हैं,
बैठ के जनता के मंदिर में हुँआ हुँआ चिल्लाते हैं,
ये हैं अपने देश के नेता जूता चप्पल खाते हैं ,
देश को गिरवी रखकर ये सब जय हो जय हो गाते हैं ,
आम आदमी पूछे तो ये खुले आम धमकाते हैं .
जनता बनी मूक दर्शक बस इसी बात का रोना है.
ये देश सलोना हैं .

सैकडों घोटाले हुए देश में आज़ादी के बाद.
सभी नहीं तो कुछ तो होगा आप सभी को याद .
कोई ऐसा नहीं कि जिसमे न हो इनका हाथ.
देश लूट कर भी जनता से करते ये फ़रियाद,
मूँछ मुड़ा के, पूछ हिला के, भौंकते यही कि.
वोट इन्हें ही देना है.
ये देश सलोना है.

जनता करती त्राहि त्राहि, तब ये एसी में सोते हैं.
बाढ़ में बहती जनता हो तो ,ये होटल में होते हैं,
य़े नेता हैं देश के अपने,कान में रूई डाल सोते हैं .
वोट मांगना पड़े तो सबके पांव पकड़ के रोते हैं .
इनको अब तो सबक सिखाओ, होगा वही जो होना है.
ये देश सलोना है.

अगर चाहते हो दुनिया में देश का मान बढ़े यारों.
ऐसे नमक हरामों को जब मिलें तो बस जूते मारो.
अपनी मां धरती मां को तुम अपनी हिम्मत से उबारो.
दबे सताये लोगों को तुम अपनी मेहनत से उभारो.
जीने को कीड़ा जी जाता, जो तुमसे जिये वही जीना है.
ये देश सलोना है.  

मिलन चौरसिया. मऊ.

 

 

टिप्पणियाँ

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.