सोमवार, 26 नवंबर 2012

प्रेम मंगल की कविता - नारी

image

नारी

प्रेरणादायिनी, सह्रदया, कोमलता की प्रतीक हो तुम

तेजस्‍विनी, महिमामयी, कर्तव्‍यनिष्‍ठावान हो तुम,

सर्वरुपिणी, विश्‍वेश्‍वरी, अखिलेश्‍वरी भी हो तुम,

दीनों का दुःख हरने वाली, मदर टेरेसा हो तुम ।

 

राष्‍ट्र निर्माता,शासन चालक,राष्‍ट्रपति औ प्रधानमंत्री भी हो तुम,

अन्‍वेषणकर्ता,व्‍यवसायी औ समन्‍दर जाकर घ्‍वज को फहराने वाली,

एवरेस्‍ट चोटी चढने वाली,मंगलग्रह तक जाने वाली भी हो तुम,

मानवसंसाधन, विश्‍वविद्यालय औ संस्‍थायें चलाने वाली भी हो तुम

फोटोग्राफी ,करने वाली मीडिया कर्मी ऊर्जा स्‍त्रोत भी हो तुम

प्रेम, क्रोध औ पथ प्रदर्शक, सब रूपों में दिखने वाली हो तुम ।

 

प्रथम रूप में बेटी बनकर प्‍यार सभी का पाती हो तुम

द्वितीय रूप में बहना बनकर सच्‍चा प्‍यार लुटाती हो तुम,

तृतीय रूप में पत्‍नि बनकर धर-संसार चलाती हो तुम ,

चतुर्थ रूप मे मां बनकर सबको गले लगाती हो तुम ।

 

कौन क्षेत्र वंचित है तुमसे कहां नहीं पहुंच पाई हो तुम

गरिमा बनकर अपनी मर्यादा में रहकर सबसे आगे बढ़ने वाली हो तुम

दृढ़ निश्‍चय अटूट तुम्‍हारा कभी न धोखा खाने वाली हो तुम

दुआ प्रेम की सबसे यह है नित नये स्‍त्रोतों से ऊॅचाइयों को छुओ तुम

 

--

प्रेम मंगल

कार्यालय अघीक्षक

स्‍वामी विवेकानन्‍द इंजीनियरिंग कॉलेज

इन्‍दौर म...․प्र․

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

और दिलचस्प, मनोरंजक रचनाएँ पढ़ें-

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------