शनिवार, 17 नवंबर 2012

विनय भारत की लघुकथा - कैसा वृक्षारोपण?

पर्यावरण दिवस के आयोजन पर विद्यालय में नेताजी द्वारा वृक्षारोपण किया गया। विद्यालय के प्राचार्य ने नेताजी का माल्‍यार्पण कर स्‍वागत किया और उन्‍हें बधाई दी। इसके बाद नेताजी भाषण देने लगे और प्रेस-रिपोर्टरों ने अपनी गतिविधि शुरू की ऐसा लगने लगा जैसे नेताजी पहले से ही वेदग्रंथो का निचोड़ कंठस्‍थ कर आए थे।

नेताजी - मित्रों वृक्ष हमारा जीवन है। यदि हम सूखे वृक्ष काटें तो बीस वृक्ष लगाऐं।

......एक वृक्ष सौ पुत्रों के समान हैं ......

अचानक नेताजी का फोन बज उठा उन्‍हें पता चला कि उनके छोटे पुत्र की तबीयत खराब है सुनते ही नेताजी प्राचार्य का धन्‍यवाद कहकर चल दिए। नेताजी अपनी ए.सी. कार और सुरक्षाकर्मियों के दल-बल सहित जा चुके थे। उनके जाने के बाद लोगों ने देखा कि अनेक हरे पौधे कुचले पड़े थे और नेताजी की गाडियों के निशान पर्यावरण दिवस पर उनके जौहर की गाथा गा रहे थे।

लेखक - विनय भारत

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