शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

कुबेर का व्यंग्य - तोता रटंत

व्‍यंग्‍य

तोता रटंत

कानूनी शिकंजे में बुरी तरह जकड़ा और मुक्‍ति हेतु छटपटाता संयोगवश वह ऋषि के आश्रम में पहुँचा। उसका तन ही नहीं मन भी बुरी तरह आहत हो चुका था। उसकी दयनीय हालत देखकर ऋषि का मन करुणा से भर उठा। उसने उसका परिचय पूछा - ''वत्‍स तुम कौन हो?''

''स्‍वामी मैं इस देश का महामंत्री हूँ।'' उसने अपना परिचय दिया।

''तुम्‍हारी ऐसी हालत किसने की?''

''स्‍वामी, इस देश की न्‍याय व्‍यवस्‍था हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ी हुई है। कानूनी जाल में मैं बुरी तरह फँसा हुआ हूँ। मुझे जेल की सींखचों से बचाइये।''

''वत्‍स, तुम चिंता न करो। तुम भ्रष्‍ट आचरण के बंधन से बंधे हुए हो। यहाँ कुछ दिन रहकर चित्‍त शुद्ध करो। ज्ञान रूपी प्रकाश से अज्ञान रूपी अँधकार दूर हो जाता है।''

वह आश्रम में रहकर अपना चित्‍त शुद्ध करने लगा। ऋषि उसे रोज उपदेश देता - ''भ्रष्‍ट लोग आते हैं। धन का लालच देते हैं। भ्रष्‍टाचार का जाल फैलाते हैं। लालच में आकर भ्रष्‍टाचार के जाल में नहीं फँसना चाहिये।''

ऋषि का उपदेश उसने कुछ ही दिनों में कंठस्‍थ कर लिया। उसके इस कौशल पर ऋषि बहुत प्रसन्‍न हुआ। उसने सोचा कि इसका हृदय अब परिवर्तित हो चुका है; इसे इसके साथियों के पास भेज देना चाहिये। उसने उसे बुलाकर अंतिम उपदेश दिया - ''वत्‍स, अब तुम अवगुण मुक्‍त हो चुके हो। अपने साथियों के पास राजधानी जाओ। अपने आप को कानून के हवाले करो। कानून जो भी सजा दे उसे स्‍वीकार करो क्‍योंकि अपराधी को सजा देने का अधिकार केवल राजा को होता है। अपने साथियों को भी यह मंत्र सिखाओ और अपने पापों का प्रायश्‍चित करो।''

ऋषि को आत्‍मिक प्रसन्‍नता हुई कि उसने इस देश के मंत्रियों का आचरण शुद्ध करके इस देश को भ्रष्‍टाचार के दलदल में डूबने से बचा लिया है।

कुछ दिनों बाद उसे अपने उपदेशों का सुपरिणाम जानने की इच्‍छा हुई। वह राजधानी गया। राजधानी की हालत देखकर उसे घोर निराशा हुई। उसकी प्रसन्‍नता जाती रही। उसने देखा, वह मंत्री और उसके सभी साथी भ्रष्‍ट लोगों के द्वारा फैलाये जाल में फंसकर फड़फड़ा रहे हैं और उसके द्वारा सिखाये उसी मंत्र का सामूहिक जाप किये जा रहे हैं - 'भ्रष्‍ट लोग आते हैं, धन का लालच देते हैं, भ्रष्‍टाचार का जाल फैलाते हैं, लालच में आकर भ्रष्‍टाचार के जाल में नहीं फंसना चाहिये।'

ऋषि दुखी मन आश्रम लौट आये।

000

कुबेर

व्‍याख्‍याता,

शास. उच्‍च. माध्‍य. शाला कन्‍हारपुरी,

राजनांदगांव (छ.ग.)

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