मंगलवार, 13 नवंबर 2012

शशांक मिश्र भारती के दीपावली पर तीन बालगीत

दीवाली



हम सब तुमका भेद मिटाने
आपसी कटुता भाव भगाने,
पथ-पथ प्रीत दीप सजाने
फिर आ गई है दीवाली।
सदा सत्‍य पर चलने  को
कभी   नहीं झगड़ने  को,
मिलकर आपस में रहने को
फिर  आ गई है  दीवाली।
मानवता का पाठ  पढ़ाने
ज्ञान भाव का दीप सजाने
अज्ञान व अन्‍धकार भगाने
फिर आ गई है  दीवाली।

दीपावली

हम सबको बतलाए कैसे
यह कितनी हमको प्‍यारी हैं,
आते हैं सभी पर्व एक दिन
यह सबसे लगती न्‍यारी है।
घर-घर प्रकाश फैलाकर
अंधकार को दूर भगाती है,
झूठ पे सच की विजय दिखा
सत्‍पथ पर आगे बढ़ाती है।
हर घर सुन्‍दर दीप सँजाने
प्रत्‍येक वर्ष यह आती है,
झिल मिल- झिल मिल कर
हम सबको यह भाती है॥


दीपों का त्‍यौहार

दीपों का फिर पर्व है आया
खुशियां प्‍यार अपूर्व है लाया,
असत्‌ पे सत की जीत बताता
बच्‍चों - बड़ों सभी को भाया
शाम को सजे  हर घर द्वार
अंधेरा  भगे  प्रकाश अपार
लक्ष्‍मी-गणेश का पूजन कराए
दीपावली  दीपों का त्‍यौहार॥


 
          
              
27.10.2012
हिन्‍दीसदन बड़ागांव शाहजहांपुर -242401 उ.प्र.

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