शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

दिलीप भाटिया के हाइकु

1

बेटी हूं तेरी,

जग में आने दे मां,

मत ले प्राण!

5

प्रेम की भाषा

आज कौन समझे

सभी बेगाने!

9

स्‍वार्थी दुनिया,

मतलब से पूछे,

बुरा है हाल!

13

बहन भार,

कैसे बढे़गा प्‍यार,

भाई लाचार!

17

करो पढ़ाई,

समय अनमोल,

होंगे सफल!

21

रोशनी करो,

अंधेरे घरों में भी,

पाओ संतोष!

25

नहीं संग्रह,

खाली हाथ जाएगा

संतोष रख!

 

2

गुड न्‍यूज थी,

गर्भ में मारी बेटी,

बेड न्‍यूज है!

6

कर्म करूंगा,

कुछ नहीं चाहूंगा,

इसी में शांति!

10

अपने कौन,

यही हाल सबका,

सभी पराए।

14

ऊर्जा संकट,

परमाणु बिजली,

एक विकल्‍प!

18

भगवान हैं,

घर में माता पिता,

करिए सेवा!

22

नशा है बुरा,

छोड़ दो इसे अभी,

रहो स्‍वस्‍थ!

3

ममता जीती,

रूढ़ियों को हराया,

बेटी आ गई!

7

लेने में सुख

देने में दुख नहीं,

मिले संतोष!

11

रूलाई आती,

कौन चुप कराए,

पोंछ लो आंसू!

15

अणु बिजली,

सीमित विकिरण,

नहीं खतरा!

19

बेटी पढ़ाओ,

दो कुल का हो भला,

रहेगी सुखी!

23

ईश्‍वर देता,

हम जितने योग्‍य,

मांगना मत!

4

किससे कहूं,

इतने सारे दुख,

कौन सुनेगा!

8

समय नहीं,

ममता के दो बोल,

हुए दुर्लभ!

12

बूढ़े पिताजी,

बन गए हैं बोझ,

कब जाऐंगे।

16

कम बोलना,

होंगी समस्‍या कम,

करो कोशिश!

20

सबसे प्रेम,

कम होते संकट

रखो भरोसा!

24

आधा भरा है,

सकारात्‍मक सोच,

सुखी जीवन!

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