शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

विजय वर्मा की कविता - यदि सिद्धार्थ के बदले

यदि सिद्धार्थ के बदले  [ कविता ]

एक अजीब सा विचार

आता है मन में  ,

कि यदि सिद्धार्थ के बदले

यशोधरा चली जाती वन में ?

तब भी क्या यह जग

उसे सर आँखों पे बिठाता ?

या कुलनाशिनी,व्यभिचारनी ,

गृहत्यागिनी बतलाता  ?

क्या मातृत्व-हनन का

उस पर दोष न लगता ?

क्या निष्ठुर ,निर्दयी

कहलायीं न जाती ?

क्या लान्छानाओं की सूली पर

लटकायी न जाती ?

उसे भी बीमार,वृद्ध और

मृतक को देखकर ,

दुःख हुआ होगा-----

पर बालक का भविष्य

और नारी-मर्यादा की सीमा

उसके सम्मुख हुआ होगा।

--
v k verma,sr.chemist,D.V.C.,BTPS

BOKARO THERMAL,BOKARO
vijayvermavijay560@gmail.com

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