एस. के. पाण्डेय की बाल-दिवस विशेष कविता - बच्चों के लिए : चूहे का पछतावा

बच्चों के लिए : चूहे का पछतावा

(१)

चूहा जी की शादी आई ।

भागके पहुँचे घर में जाई ।।

ससुरजी बोले क्या है भाई ?

काहेको तुम रहे लुकाई ।।

(२)

शादी नहीं, बर्बादी आई ।

इससे सब आजादी जाई ।।

समझाकर सब लिए मनाई ।

हो गई शादी चुहिया आई ।।

(३)

बैठे-बैठे हुकुम लगाये ।

चूहा दौड़े दाना लाये ।।

ठाठ से बैठी चुहिया खाए ।

ऊपर से फिर रोब जमाये ।।

(४)

रोये झूठे बात बनाये ।

मुझको कुछ भी नहीं मोहाये ।।

लेकर मुझको फिर क्यों आये ?

जब देखो तब गाल फुलाए ।।

(५)

क्या करना था क्या कर आये ?

क्या लाना था क्या ले आये ?

ऐसा कहकर बात बढ़ाये ।

चूहा जी को रोना आये ।।

(६)

कहना चाहें कह न पायें ।

चूहा जी मन में पछितायें ।।

राम प्रभू से खैर मनाएं ।

अब तो बीती बने निभाए ।

- डॉ एस के पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.) ।

http://sriramprabhukripa.blogspot.in/

-----------

-----------

0 टिप्पणी "एस. के. पाण्डेय की बाल-दिवस विशेष कविता - बच्चों के लिए : चूहे का पछतावा"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.