बच्चन पाठक 'सलिल' की कविता - एक पत्रकार का प्रेम-गीत

एक पत्रकार का प्रेम-गीत 

                       -- डॉ बच्चन पाठक 'सलिल'

एक पत्रकार ने सोचा 

प्रेम की एक कविता लिखी जाय ,

पर उसकी शैली हो पत्रकारिता की।

कविता ग्राह्य हो जाएगी 

क्योंकि उससे पेशे की स्वाभाविक बू आएगी।

उसने लिखना प्रारंभ किया 

हे प्रिये,तुम्हारा मुख चन्द्रमा के समान है 

(पुलिस सूत्रों से प्राप्त हुई है यह सूचना )

तुम्हारे लम्बे, काले कुंतल 

जब लहराते हैं अम्बर में 

वे स्मरण करते हैं 

बंगोप सागर में उत्थित सुनामी लहरों का ।

(यह कथन है प्रत्यक्ष दर्शी सूत्रों का )

तुम्हारा अंतर और बाहर मादक है 

मलय समीर की भांति 

(पर अभी नहीं हुई है इसकी अधिकारिक पुष्टि )

इसके बाद कलम रुक गयी ,

पत्रकार कवि ने फिर यों किया समापन ,

किस भाग्यशाली का 

तुम्हारे लिए होगा चुनाव ,

यह तय होगा शिखर सम्मेलन  में 

जिसके सदस्य हैं तुम्हारे पिताश्री ,

मम्मी और मामा जी।

तुम इतना ही ध्यान रखना ,

छपते छपते कॉलम में 

टाँक देना मेरा नाम भी

--

जमशेदपुर झारखण्ड 0657/2370892

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