बुधवार, 19 दिसंबर 2012

पुस्‍तक समीक्षा - उपन्‍यास : घेरे से निकलते हुए

(समीक्षक - दिलीप भाटिया)

 

पुस्‍तक समीक्षा

घेरे से निकलते हुए उपन्‍यास-लेखिका डा० सीमा मिस्‍त्री प्रकाशक-समर प्रकाशन, जयपुर-पृष्‍ठ-144, मूल्‍य रू․ 75 लेखिका सम्‍पर्क--विश्‍वकर्मा सदन, प्रमुख सोसाइटी, आंकलाव-388510 गुजरात -

 

सीमा की प्रथम कृति संवेदनशील है, संघर्ष पूर्ण जीवन की संदेशपूर्ण गाथा है․ उपन्‍यास की नायिका सलोनी घर-परिवार-ससुराल-समाज के घेरों में छटपटाती है․ पर संघर्ष भी करती है․ पिता की आज्ञा शिरोधार्य कर बेमेल विवाह के बंधन को निभाती हुई, उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त करने हेतु अनुमति लेती है, आर्थिक रूप से आत्‍मनिर्भर बनती है, असमय वैधव्‍य से उपजी कठिनाइयों का समाधान सोचती ही नहीं, उन कटीली राहों पर दो संतानों के उज्‍जवल भविष्‍य बनाने हेतु अकेली ही चलती है, ससुराल पक्ष की मनोवृत्ति समय से पहचान जाती है, कालेज-घर के कर्त्त्‍ाव्‍य निभाते हुए पडोसन द्वारा चरित्र पर लगाए गए गलत आरोपों से टूटती है, एक तलाक शुदा व्‍यक्‍ति के स्‍वार्थी प्रेम को नहीं पहचान पाती, पर चरित्र पर कलंक नहीं लगने देती․ महिला आश्रम में सेवाऐं देती है, बच्‍चों को मां की ममता के साथ पिता के संरक्षण की कमी पूरी करने का प्रयास करती है․ ससुराल की स्‍वार्थी भावना, पीहर की दया को अस्‍वीकार करती अकेले ही दोनों बच्‍चों को गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा देने के लिए घर-कालेज के दोनों मोर्चो पर संघर्ष करती है․ टूटने से पहले संभल जाती है, घेरों से निकलकर खुली हवा में सांस लेने हेतु पराए हो गए अपनों को भूलकर, परायों को अपना बनाने हेतु संकल्‍प लेती है․

उपन्‍यास की भाषा सरल है, पढ.ते हुए कई बार आंखें छलछला जाती हैं पर, सलोनी की जीवन गाथा इस प्रकार बांधे रखती है कि पूरी कृति पढ.े बिना पुस्‍तक बन्‍द नहीं की जा सकती․ यही सीमा की सशक्‍त लेखनी की सार्थकता है․

सीमा कम लिखती है․ पर सार्थक सकारात्‍मक सृजन करती है․ सीमा की इस गुणवत्‍तापूर्ण साहित्‍य-कृति से निश्‍चय ही घेरों में छटपटाते पाठक, घेरों से निकलने की राह पाऐंगे․ समाज परिवार से त्रस्‍त कुछ व्‍यक्‍ति भी अंधेरे घेरों से बाहर निकलकर उजाले में आ पाऐं, तो सीमा की यह कृति सार्थक होगी․

अनुजा सीमा को दिलीप भैया की दिल से शुभकामना, जाने अनजाने पाठकों के साथ यह भाई भी सीमा बहन की दूसरी कृति की प्रतीक्षा करेगा․

समीक्षक- दिलीप भाटिया

रावतभाटा 323307

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------