रविवार, 23 दिसंबर 2012

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की बाल कविता - पता नहीं क्यों अम्मा मुझको , परियों वाली कथा सुनाती।

पता नहीं क्यों

हाथी घोड़े बंदर भालू,

की कवितायें मुझे सुनाती

 

पता नहीं क्यों अम्मा मुझको ,

परियों वाली कथा सुनाती।

image

मुझको य‌ह मालूम पड़ा है,

परियां कहीं नहीं होतीं हैं।

जब‌ सपने आते हैं तो वे,

पलकों की महमां होती हैं।

 

पर हाथी भालू बंदर तो,

सच में ही कविता पड़ते हैं।

कविता में मिल जुलकर रहते,

कविता में लड़ते भिड़ते हैं।

 

बंदर खीं खीं कर पढ़ता है,

हाथी की चिंघाड़ निराली।

भालू हाथी शेर बजाते,

इनकी कविता सुनकर ताली।

 

सियार मटककर दोहे पढ़ता,

और लोमड़ी गज़ल सुनाती।

कभी शेरनी गज़लें सुनने ,

भूले भटके से आ आती।

 

रोज़‌ नीम के पेड़ बैठकर,

कोयल मीठे गाने पाती।

पता नहीं क्यों अम्मा मुझको ,

परियों वाली कथा सुनाती।

 

हिरण चौकड़ी भरकर गाता,

होता है जब वह मस्ती में।

रोज सुबह ही गीत सुनाता,

मुर्गा जब होता बस्ती में।

 

शुतुर्मुर्ग की ऊंची गर्दन,

नहीं किसी मुक्तक से कम है।

कविता पढ़कर करे सामना,

गधा कह रहा किसमें द‌म है।

 

बड़ा सलोना सुंदर लगता,

बकरी का मैं मैं का गाना।

मन को झंकृत कर देता है,

सुबह सुबह से गाय रंभाना।

 

बदक नदी और तालाबों में,

तैर तैर कर छंद सुनाती।

मछली की रंगीन लोरियाँ,

मन को पुल‌कित करकर जातीं।

image

देख देख मैंना को तोता,

हर दिन पढ़ता सुबह प्रभाती।

पता नहीं क्यों अम्मा मुझको ,

परियों वाली कथा सुनाती।

5 blogger-facebook:

  1. बढ़िया बाल कविता....
    बदक नदी और तालाबों में,यहाँ बदक की जगह बतख होना चाहिए या बढक भी कुछ होता है

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बेनामी2:36 pm

      बदक नदी और तालाबों में,यहाँ बदक की जगह बतख होना चाहिए या बढक भी कुछ होता है

      आगे पढ़ें: रचनाकार: प्रभुदयाल श्रीवास्तव की बाल कविता - पता नहीं क्यों अम्मा मुझको , परियों वाली कथा सुनाती। http://www.rachanakar.org/2012/12/blog-post_2509.html#ixzz2G9D6g12h

      हटाएं
  2. बड़ी मासूम सी कविता

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेनामी7:28 pm

    षमा करें उचित शब्द बतख ही है |टाइपिंक की गलती से बदक हो गया है|
    प्रभुदयाल‌

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. छत्तीसगढ़ी में बदक ही कहा जाता है.

      हटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

और दिलचस्प, मनोरंजक रचनाएँ पढ़ें-

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------