नीरा सिन्हा की कविता - श्मशान वैराग्य

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श्‍मशान वैराग्‍य

हर घंटे बलात्‍कार का शिकार होती

युवतियां, नाबालिग लड़कियां, बच्‍चियां

भारत में

खतरनाक जगह बन गया है भारत

महिलाओं के लिए

क्‍योंकर हंगामा बरपा है ससंद में

क्‍या महिलाओं को आरक्षण मिलेगा ?

क्‍या महिलाएं वस्‍तु से इंसान बना दिए जाएगें ?

क्‍या महिलाओं को समानता का अधिकार मिलेगा ?

हर निगाह सवाली है

अरे हंगामा तो शांत हो गया संसद में

तो बंद करो ये तमाशा

ये दोहरा मानदंड़

ये पुरूष....

महिलाओं को पहले देवियां बनाते है

और गिलाफ के अंदर भी बलात्‍कार कर जाते है !

गुवाहटी और दिल्‍ली में हुए बलात्‍कार पर

हंगामा मचाते है और

सोनी सोरियों को कानून के दायरे में नंगा कर जाते है !

बंद करो ये नाटक श्‍मशान वैराग्‍य की तरह

बंद करो !!!

 

नीरा सिन्‍हा

प्रोफेसर कॉलोनी, न्‍यू बरगंड़ा

गिरिडीह 815301 झारखंड़

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1 टिप्पणी "नीरा सिन्हा की कविता - श्मशान वैराग्य"

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