गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

विश्व दीपक जैन की कविता - कन्या भ्रूण हत्या


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कन्या भ्रूण हत्या 
मुझे आने दो संसार में माँ
मैं भी इस संसार में जीना चाहती हूँ
संसार की हर राह में जाना चाहती हूँ
आपकी आवाज सुनना चाहती हूँ
नष्ट न कर दे ये कोई देह मेरी,
मैं भी बेटे जैसी बनना चाहती हूँ
बेटे के हर कार्य मैं करना चाहती हूँ
बेटों से आगे जाना चाहती हूँ
सूर्य की वह धूप लेना चाहती हूँ
चाँद से बात करना चाहती हूँ
मुश्किलों को आसान बनाना चाहती हूँ
मैं देश की आवाज बनना चाहती हूँ
देश का गौरव बढ़ाना चाहती हूँ
आपके करीब रहना चाहती हूँ
पक्षियों का कलरव सुनना चाहती हूँ
आसमां को छूना मैं चाहती हूँ
हर दिशा में जाना चाहती हूँ
रोक दो गर्भ में मरण का सिलसिला,
क्योंकि मैं भी आप जैसी बनना चाहती हूँ
मुझे आने दो संसार में माँ
मैं भी इस संसार में जीना चाहती हूँ
मुझे आने दो संसार में माँ
                       "विश्व दीपक जैन"

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