रविवार, 23 दिसंबर 2012

अमरीकसिंह कंडा की लघुकथाएँ

कंडे का कंडा

अमरीकसिंह कंडा

मिसयूज़

दफ़्तर की किसी भी चीज़ का मिसयूज़ नहीं होना चाहिए,अगर मुझे पता लग गया कि किसी ने भी दफ़्तर की किसी भी चीज़ का मिसयूज़ किया है तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा,मैं चाहता हुँ कि मिसयूज़ का मैं दफ़्तर में न भी न सुना।" नये आए डी.सी. साहब ने यह बात स्टाफ मीटिंग में कही।

"यह यार इसका सुपीडो मीटर सात सो किलोमीटर बैक करते।" डी.सी.दे चालक ने वर्कशाप जा कर इलैकटीशन को कहा

"क्या बात हो गई,आगे तो मीटर आगे कराने आते औ,आज पीछें कराई जाते औ मकान मालिको क्या बात हो गई?" इलैकटीशन ने कहा।

"ओए बात क्या राख होनी आ,आगे तो साहब की कार खड़ी रहती था और सपीडो मीटर भी खड़ा रहता था,हम तो आगे करवाते था पेट्रोल के पैसे खाते था।

"अब क्या हुआ,वही तो मैं पुच्छदें?"

"बात यह यह हमारे डी.सी. साहब वैसे तो बहुत सख़्त ने,थोड़े दिनों के लिए डी.सी.साहब की कार उन का साला घूमने फिरन के लिए ले गया, साले को साला तेल भी हम पुवा कर दिया, साहब ने बगार पाई था,हम भी कोई न कोई न कोई काम करवा लेंगे,परन्तु साहब का कहना ए कर कोई सरकारी चीज़ का मिसयूज नहीं करना, बात सुन करनैल तू इसमें में से नया नया समान उतार ले और पुराना समान डाल के,समझ गया नामेरी बात,हम ने मिसयूज नहीं करना,जेब भी खाली हुई पड़ी हैं।"उस हँसते हुए कहा।" और दो घंटों बाद "यह ले बई तेरी गाड़ी का सपीडो मीटर भी बैक कर दिया और साथ ही नया समान निकाल कर पुराना पुवा दिया,और यह चक्कों पहले की तरह अपनी लेबर का बिल दुगना लगा दिया,मसयूज हम ने भी नहीं करना।" इलैकटीशन ने हँसते कहा

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कंडे का कंडा

अमरीकसिंह कंडा

कुंडली

यह साले का विवाह नहीं होना,जो आता फिर जाता हैं।" पति ने पत्नी को कहा।

"कोई न जी कोई तो होयेगा जो मेरे लाल को छुबारा लगायेगा।" पत्नी ने कहा।

"एक तो बेकार में डफल सा हवा,एक कोई नशा नहीं छड्डदा,कौन सा डुबोयेगा बेटी अपनी?"

"मेरी बहन कहती था कि इतवार को उनके गाँव के कोई जिमीदार आ,वह यह रहे आ देखने मेरे लाल को।"

"परन्तु जना खना तो आजकल कुंडली देख का,इसकी उम्र भी ज़्यादा हो गई हैं।"

"आप फिक्र न करो जी मैं सारा अपनी बहन को समझा दिया,बस आप चुप रहउ।"

दूसरे दिन जब लड़की वाले आए तो उन्होंने आते ही पूछा कि लड़का कहाँ है?"

तो मध्यस्थ औरत ने कहा कि वह तो बाहर गया हुआ है।

उसकी कोई न कोई कुंडली तो पड़ी होगी?"

"जी उसको ई पता कुंडली कांडली का,कल को आ जायेगा।" माँ ने कहा।

"आप कौन से पंडित के पास से कुंडली मलाउनी ए?" मध्यस्थ औरत ने लड़की वालों को पूछा।

"जी यह तुम्हारे शहर में सात पाल पंडित इसी के पास से हम तो पूछ ताश करते हूँ।" लड़के वालों कहा।

"ठीक आ आप लड़की की कुंडली के जाओ हम कल को जब लड़का आ जायेगा उस से उस की कुंडली ले कर आपके पंडित के पास दोनों की कुंडली वाला साँप मिला कर दस देंगे।"मध्यस्थ औरत ने कहा।

"ठीक आ,आप रख लो लड़की की कुंडली।" लड़की वाले कुंडली के गए। और उसी शरणार्थी को लड़के वाले पंडित जी को मिलने उसके घर गए और पंडित जी के साथ लेने देने की बात हो गई। दूसरे दिन पंडित जी ने लड़की लड़के टेवे मिला दिए।

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कंडे का कंडा

अमरीकसिंह कंडा

गिरगट

आ चार कप चाय के बना दानव बीबी जी जमांदार आए ने नाली निकालने।" एक जमांदार ने घर के दरवाज़े आगे ले जा कर कहा

"ओए महीना महीना घुसते अरी आप आडर आए दिन्ने हूँ जैसे हम नौकर हुन्ने वें।"चंदन के साथ ने दरवाज़ा उबलते कहा।

"मैं कहा जी, क्यों बोली जाते हो आगे ही बड़ी मुशकिल से आते आ ओर न भगा ही दानव,कोई न चार कप चाय ई आ न बना दिन्नी हूँ।" इतना केह कर वह चाय बनाने लग पड़ी।

"ऐसे ही साले आ जाते आ,खाने पीने को आगे और काम को साले को गोली पड़ जाती आ गंदी जाति न हो,मैं कहना क्या कहना क्या कहना,ई.उ.ु को कह कर सस्पैंड करा देने आ किसी दिन,साथ ही मेरी बात सुन वह पुराना सा स्टील का गिलास और यज्ञ पड़ा न उसके में के देवी,अपने आप चारों बारी बारी पी लेंगे।" वह अंदर बैठा बुड़बुड़ किए जा रहा थी। जमांदारें ने बारी बारी एक ही गिलास में चाय पित्ती और नाली साफ़ करते करते एक जमांदार को वाली ढूँढी और उसने गन्द की लिबड़ी हुई वाली हाथ के साथ उठा कर ऊँची देने कहा,"सरदार जी यह वाली ढूँढी आ,कहीं तुम्हारी तो नहीं?" वाली की बात सुनते सार ही चंदन के साथ के पैरों नीचे जैसे पहिया लग गए हों। वह भागा भागा बाहर आया और कहने लगा।

"यह वाली तो पिछले हफ्ते हमारी लड़की के पास से खो गई थी वह मिलने आई था हमें।"उसने जमांदार के पास से गन्द की लिबड़ी हुई वाली छीनते हुए कहा।

"अच्छा बीबी जी हम चलते हूँ दो सा बालटियें पानी की बाहर नाली में मार दानव,नाली निकाल दी हैं।" जमांदार ने जाते हुए हुए कहा।

"आए कैसे चले जाउंगे आप, हम रोटी खादे बगैर अरी जाएँ देना,आप अपनी बहन की वाली ढूँढी आ,बिसनीए तू जल्दी जल्दी प्रसादे बना और अंदर से चार नये थाल निकाल और साथ ही बात सुन, देसी घी का प्रसाद भी बना ले।" बिसनी प्रसादे बनाने लग पड़ी और चंदन के साथ उन को बैठक में बिठा कर पानी पीला रहा था।

पता -1764 -गुरू राम दास नगर नज़दीक नैसले मोगा -142001

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