शनिवार, 15 दिसंबर 2012

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य - लॉबिंग और दलाली

लॉबिंग और दलाली

यशवन्‍त कोठारी

लॉबिंग और दलाली दो सगी बहनें थी। दोनों एक दूसरे पर जान देती थी, जब जैसी जरुरत होती लॉबिंग अपनी बहन दलाली की मदद से सभी के काम सलटाने का जिम्‍मा ले लेती थी, लॉबिंग बहना के विदेशों में भी बहुत अच्‍छे सम्‍पर्क थे, वह अमेरिका की कम्‍पनी की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहती थी। किसी भी प्रकार के काम के लिए वाजिब दाम लेकर लॉबिंग व्‍यवस्‍था को समझा कर कम्‍पनी का काम कर देती थी राडिया भी लॉबिंग में ही विश्‍वास करती थी। दलाली वैसे तो छोटी बहन थी। मगर चुल बुली, जवान तेज तर्रार और धूर्त थी। वो सरकारों को बदलने की हिम्‍मत रखती थी। जब जैसा अवसर हो वह बड़ी बहन लॉबिंग को समझा-बुझा कर काम निकलवाने की हिम्‍मत रखती है। लोकतन्‍त्र को जेब तन्‍त्र में बदलने की हिम्‍मत थी दलाली में। संसद में पक्ष में वोट दिलाना उसके बायें हाथ का खेल था। भाषण विपक्ष में दिलाकर सरकार बचाने में माहिर थी लॉबिंग। वैसे हर सरकार , व्‍यवस्‍था लॉबिंग और दलाली के सहारे ही चलती है।

संसद में और संसद के बाहर हर फैसला लॉबिंग और दलाली बहनों पर ही निर्भर करता हैं। विदेशों में लॉबिंग बहन के जलवे को कानूनी मान्‍यता प्राप्‍त है मगर देश में ये बहने दबे-ढंके रुप में काम करती है। देश में लॉबिंग और दलाली को रिश्‍वत का ही रुप माना जाता है। ये तीनों बहनें मिल कर कयामत ढा सकती है। एक सांसद ने तो स्‍पष्‍ट कह दिया कि मुझे और मेरी पार्टी को अंगे्रजी नहीं आती अतः ये बहने हमारे पास नहीं आती। अर्थात ये बहने अंगे्रजी जानने वाले लोगों के आस-पास घूमती रहती है ओर मौका मुनासिब देख कर निर्णय करवा लेती है। पैसा इन बहनों की जेब से निकल कर कहां गया यह जानना जरुरी नहीं है। जरुरी ये है कि लोकतन्‍त्र की पटरी पर चढ़ा पूंजीवाद पटरी से क्‍यों उतर रहा है। पैसा पेड़ों पर नहीं लगता मगर लॉबिंग और दलाली के बट वृक्षों पर बैठा रहता है। इसकी कृपा से डेमोके्रसी मनीके्रसी हो गई है।

सरकारें एक दूसरे को पूछ रही है। लॉबिंग लेवल की युवती तुम्‍हारे पास आई है क्‍या। उत्‍तर में विपक्ष दलाली नामक युवती के बारे में पूछ ताछ करते हुए रिश्‍वत की ओर इशारा कर रहा है। सभी एक ही थैली के चट्‌टे बट्‌टे हैं। सभी चोर मौसेरे भाई है और ये मौसेरे भाई इन बहनों को आगे कर के सत्‍ता रुपी द्रेापदी का चीर हरण कर रहे है। सौ-दो सौ करोड़ कि भ्रष्टाचार की बात करना गुनाह है क्‍यों कि 2 लाख करोड़ रुपयों के भ्रष्‍टाचार की हवाएँ चल रही है। हर गली मोहल्ले में लॉबिंग, दलाली और रिश्‍वत रुपी बहने सज-धज कर आने-जाने वालों को इशारा कर रही है। बस संसद में बयान देने जितना काम है बाकी सब कुछ हाजिर है। आपके लिए․․․․․․․। 0 0 0

-यशवन्‍त कोठारी

86, लक्ष्‍मी नगर, ब्रह्मपुरी बाहर, जयपुर - 2

फोन - 2670596

ykkothari3@gmail.com

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