मंगलवार, 31 जनवरी 2012

कैस जौनपुरी के नगमें

तुम अहसास हो तुम अहसास हो मैं जज्बात हूँ तब तक न मिलें जिन्दगी अधूरी है.... यही है रिश्ता हमारा तुम्हारा बिन एक दूजे के तू भी कुछ नहीं मैं...

अनन्त भारद्वाज की दो कविताएँ

स्मृतियाँ..... उन प्यार करने वालों के नाम जिन्हें अपनी बीती ग़ज़ल हर रोज याद आती है, और दिल  भूलना चाहता है उस परी को... पर आँखें भी.. क्...

प्रमोद भार्गव का आलेख - पाठ्‌यक्रम में यौन शिक्षा

  किशोरावस्‍था में किशोर छात्र-छात्राओं को एड्‌स जागरूकता के बहाने सरकारी पाठशालाओं में यौन शिक्षा परोसने की तैयारी राष्‍ट्रीय महिला आयोग क...

सोमवार, 30 जनवरी 2012

विजय पाटनी की कविताएँ

1 जरा समय निकाल कर आ... तेरे मेरे दरमियान कुछ बातें , अधूरी पड़ी हैं जरा समय निकाल कर आ थोड़े मेरे "लफ्ज" ले जा ,थोड़े अपने &q...

कैस जौनपुरी का धारावाहिक - 19 वीं कड़ी - आओ कहें... दिल की बात : कामवाली बाई

पिछली कड़ियाँ  - एक , दो , तीन , चार , पांच , छः , सात , आठ , नौ , दस , ग्यारह , बारह , तेरह , चौदह , पंद्रह , 16 , 17 , 18 आओ कहें.....

रविवार, 29 जनवरी 2012

शिखा गुप्‍ता की कविताएँ

कविता चंचल मन यूं ही बैठे-बैठे मैं खुद से बात करती हूं की क्‍या सोचता रहता है ये मन क्‍या चाहता है पर जवाब नहीं मिलता। वक्‍त वेवक्‍त क्‍यो...

दीपक कुमार पाठक की कविता - आबे-जमजम और आबे-गंगा

लगता है आग बुझ गई है जहन से हमारे, थोड़ी हवा तो दो शायद दबा शोला कोई दहक जाए। आँख नम होती नहीं हैं, क्‍यों हमारी मौत पर, कोशिश तो करो शायद ...

गोवर्धन यादव की लघुकथा - भूख

भूख . "क्यों भाई...अच्छे खासे हट्टे- कट्टे नौजवान हो, कोई काम- धंधा क्यों नही करते.,भीख माँगते हुये तुम्हें शर्म आनी चाहिये" &q...

प्राण शर्मा की कविता : मेरे वतन के लोगों मुखातिब मैं तुमसे हूँ

  मेरे वतन के लोगों मुखातिब मैं तुमसे हूँ   क्यों कर रहे हो आज तुम उलटे तमाम काम अपने दिलों की तख्तियों पे लिख लो ये कलाम तुम बोओगे बबूल तो...

कवि मनोहरलाल हर्ष की पुस्‍तक ‘मूषक पुराण‘ का विमोचन

मनोहर लाल हर्ष पौराणिक संस्‍कृति से जुड़े प्रसंगों का श्रद्धा से चित्रणः संवित सोमगिरी जी बीकानेर/जयपुर। हास्‍य व्‍यंग्‍य रचनाकार एवं चित...

नरेन्द्र कुमार तोमर की कविताएँ

1 पड़ चुके थे वोट पड़ चुके थे वोट हो चुके थे चुनाव चल रही थी कांउटिग आ रहे थे नतीजे- सजे हुए एक आलीशान ड्राइगंरूम में अंग्रेजी शराब के पेग ...

धर्मेन्द्र कुमार सिंह की कविता - पैसे का प्रवाह

गर्मी ठंढक की तरफ बहती है विद्युत धारा कम विभव की ओर बहती है पानी नीचे की तरफ बहता है ऊर्जा का हर स्वरूप हमेशा बहता है ज्यादा से कम की तरफ...

अनुराग तिवारी की कविता - शहर पसारे पाँव

शहर पसारे पाँव, सिकुड़ते गाँव। हाकिम पहुँचे चौपालों पर, एक नया फ़रमान लिए, ले लो यह नोटों की गड्डी, अब ग्राम भूमि सरकारी है। यहाँ बनेगी फ़ैक्...

एस के पाण्डेय का व्यंग्य : अखिल भारतीय नास्तिक सम्मेलन

एक बार नास्तिकों ने ‘अखिल भारतीय नास्तिक सम्मेलन’ आयोजित करने की योजना बनाई। सभी नास्तिकों को बुलावा भेजा गया। नियत दिन, समय और जगह पर बड़े-...

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की कविता : कह रही थी चीखकर मैं सत्य की परछाईं हूं

  स्वस्थ थी अच्छी भली थी डाक्टरों ने मार डाला डाक्टरों की ही चली थी डाक्टरों ने मार डाला।   लाख कोशिश की बचा लें हम किसी लाचार को दाल उनकी ह...

शनिवार, 28 जनवरी 2012

धर्मेन्द्र कुमार सिंह का कविता / गीत / नवगीत व ग़ज़ल संग्रह - ईबुक : अम्ल क्षार और गीत

धर्मेन्द्र कुमार सिंह का कविता / गीत / नवगीत व ग़ज़ल संग्रह - ईबुक : अम्ल क्षार और गीत -- ईबुक यहीं पढ़ें या पीडीएफ रूप में निशुल्क डाउनलो...

प्रमोद भार्गव का व्यंग्य : चुनावी काले धन के जनकल्‍याण

अब चुनावी धन काला हो या सफेद अपने राम को क्‍या ? धन पर थोड़े ही काला-सफेद लिखा होता है। उसकी महिमा तो राष्‍ट्रपिता की छपी तस्‍वीर से है। रा...

शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

लाल्टू की कहानी - बेवकूफ

आ ज सुबह से उसे उदासी का दौरा पड़ा हुआ था। मायूस एक चेहरा लादे वह दफ्तर में कागजों को इधर-उधर करता रहा। कुछ भी करने में मन नहीं लग रहा था। ...

अरूणिका भटनागर की दो कविताएँ

अजन्मी माँ जब भी किसी माँ के पेट में बेटी आती है, माँ-बाप की मुस्कान क्यों चली जाती है? बेटी ही तो एक दिन बनती है बहन, बाँधती है रक्षा-सूत...

गुरुवार, 26 जनवरी 2012

चन्द्रकान्त देवताले की कविता - आकाश की जात बता भइया?

धूं- धूं कर धधकती फैलती आग भाइयों यहाँ तो पीने के पानी का अकाल है । मारकाट-चीख-पुकार- भगदड़ बहनों यह तो दूल्हाचार और बने गाने का मौसम है । ...

अनुराग तिवारी की देशभक्ति कविता

ऐ देश के युवाओं ऐ देश के युवाओं, आगे कदम बढ़ाओ। अपने को एक करके, स्‍वदेश को बचाओ। कर्णधार हो तुम्‍हीं देश के, तुम्‍हीं देश के माझी। मझधार...

मीनाक्षी भालेराव की दो कविताएँ

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्र वन्दना बाकी है संभल जाओ ऐ दुश्मने जहाँ अभी वीरों को जगाना बाकी है किसी को सुभाष किसी को भगत सिंह बनाना बाकी ...

शशांक मिश्र भारती की गणतंत्र-दिवस विशेष कविता

फहराये चहुं ओर तिरंगा आज देखूं यदि देश की हालत तो आता है रोना , पर सत्‍ता स्‍वार्थ की जोंकों का देख रहा हूं सोना , एक नहीं असंख...

देवेन्द्र कुमार पाठक 'महरूम' का गणतंत्र दिवस विशेष गीत

       गणतंत्र दिवस                           ~~~~~~  गणतंत्र दिवस,                         गणतंत्र दिवस;                   यूँ दर्द छुप...

अरविंद कुमार की दो कविताएँ

मैं गुलाब हूँ मैं गुलाब हूँ मुझमें है बहुत खुशबू यह किसको नहीं पता, खुद दुख दर्द सहकर दूसरों को खुशबू देता हूँ। तोड़ लेते हैं मुझे बड़ी ब...

एस. के. पाण्डेय की बच्चों के लिए कविता : महान भारत

   बच्चों के लिए:  महान भारत  अपना भारत देश महान । दुनिया में इसकी पहचान ।। धर्म अध्यात्म ज्ञान विज्ञान । अन-जन-धन की, है यह खान ।। कर्मठ...

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

कैस जौनपुरी के नगमें - क्या कहूँ कुछ कहा नहीं जाये, बिन तेरे अब जिया नहीं जाये

क्या कहूँ कुछ कहा नहीं जाये क्या कहूँ कुछ कहा नहीं जाये बिन तेरे अब रहा नहीं जाये मिल जाये तू इक कतरा सही बिन तेरे अब जिया नहीं जाये दिल ह...

शशांक मिश्र भारती की कविता - चादर

सरदी के कठोर मौसम में झूम रहा है एक झाड़ी के मध्‍य मग्‍न हुआ मेरा मन, देख रहा हूं हिम से ढके उस मैदान को।   मैं अकेला दुःखियों का प्रिय शोक...

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की चार रचनाएं : नया साल

नया साल आ चुका है चुनौतियां देता हुआ | प्रस्तुत हैं चार छोटी रचनायें [1] कूद कूद कर आ जाता है साल और दर साल आता है तो आने भी दो इसका न...

सोमवार, 23 जनवरी 2012

कैस जौनपुरी की कविता - मैं रेल की पटरी हूँ...

मैं रेल की पटरी हूँ... मैं रेल की पटरी हूँ... कुछ कहना चाहती हूँ... मैं रेल की पटरी हूँ... पड़ी रहती हूँ अपनी जगह पर लोग आते हैं लोग जाते हैं...

प्रमोद भार्गव का आलेख - कुपोषण बनाम राष्‍ट्रीय शर्म

  प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की इस आत्‍मस्‍वीकृति को दाद देनी होगी कि उन्‍होंने कुपोषण की हकीकत को स्‍वीकारते हुए ‘राष्‍ट्रीय शर्म' ...

कैस जौनपुरी का धारावाहिक - 18 वीं कड़ी - आओ कहें... दिल की बात : गर्भपात

पिछली कड़ियाँ  - एक , दो , तीन , चार , पांच , छः , सात , आठ , नौ , दस , ग्यारह , बारह , तेरह , चौदह , पंद्रह , 16 , 17 आओ कहें...दिल ...

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