बुधवार, 31 अक्तूबर 2012

रहीम खान का आलेख - वक्‍त के साथ गुम होते बहुरूपिया

वक्‍त के साथ गुम होते बहुरूपिया ( दूसरों को हंसाने वाला खुद गमगीन) किसी ने सही लिखा है कि इंसान को यदि जिंदगी में कामयाब होना है तो आम जिं...

अमरीक सिंह कंडा की लघुकथाएँ

कंडे का कंडा जानवर मनुष्य ब्रह्मा जी ने आदेश दिया कि एक महीने के बाद मनुष्य बनाने का काम बंद कर दिया जाए। देवता जल्दी-जल्दी जानवर बनाए जा...

राजीव का आलेख - शक्ति या रोग

शक्‍ति या रोग झारखंड़ के बोकारो जिला में एक गांव है बालीडीह जहां हर साल दशहरा के नौंवी पूजा के दिन जितनी भीड़ माँ दुर्गा के मूर्ति के पंडाल ...

विजेंद्र शर्मा की जसपाल भट्टी को समर्पित एक नज़्म......

जसपाल भट्टी को समर्पित एक नज़्म...... ज़रुरत ज़मीं के बदतर हालात देख कभी – कभी उपरवाला भी हो जाता है ग़मज़दा.. उसे भी लगता है कोई उसे ...

राजीव आनंद की कविताएँ

  उँ ब्रह्मांड का प्रतीक है उँ प्रणव मंत्र एक ध्‍वनि शरीर के भीतर भी शरीर के बाहर भी     सून हर कोई सकता नहीं     सुनने लगता है जो इसे    ...

राजीव आनंद की लघुकथा - खुशखबरी

खुशखबरी मधुमेह से जीवन बढ़ जाता है, ये कहना था रविन्‍द्र बाबू का। रविन्‍द्र बाबू बड़े ही मस्‍तमौला किस्‍म के व्‍यक्‍ति थे। बाइपास सर्जरी भी...

अजय कुमार मिश्र ‘अजय श्री‘ की कविता - गौरैया की मांग

गौरैया की मांग छत पर बैठी गौरैया फुदक-फुदक कर करती मांग। दे दो मुझका दाना पानी, दिखता है बस अब मकान। नहीं मिले अब वो बाग बगीचे, नहीं रहे अ...

सुरेन्द्र अग्निहोत्री की कविता - नौसिखुआ न कहो

नौसिखुआ न कहो..... जवां हैं हम जवां हैं उमंगें हर ताल पर झूम सजगता की अभिव्यक्ति रंगो से बुना यथार्थ बाजीगरों के नए ठिकाने रोशनी की नई किरण...

पुस्तक समीक्षा - लघुकथा संग्रह : डोर

पुस्‍तक समीक्षा समीक्षक - दिलीप भाटिया रावतभाटा --- डोर (लघु कथा संग्रह) लेखक-पंकज शर्मा, 19 सैनिक विहार , जण्‍डली , अम्‍बाला शहर । प...

भूपिंदर सिंह के कुछ शेरो-शायरी

1.बन्दा ए दिल ए नाज़ुक का मक़ान है रात भर छत को नज़र पे उठाये रहता है 2. शर -गफ्त बहक-आदाब और बे-नू सा दिखा अदना गली का हर शख्स भूखा और मय-बू...

मीनाक्षी भालेराव की कविताएँ व गीत

पुणे की मेयर के साथ समानित होते हुए पिछली रात पिछली रात मोहल्ले में हो गया हल्ला हल्ला ओ हल्ला किसी ने कहा चोर था किसी ने कहा डाकू म...

मंगलवार, 30 अक्तूबर 2012

तेजेन्द्र शर्मा की कहानी : कल फिर आना...

कल फिर आना.... : तेजेन्द्र शर्मा “देखो रीमा, मैं अब पचास का हो चला हूं। मेरे लिये अब औरत के जिस्म का कोई मतलब नहीं रह गया।.... अब तुम मुझ...

दिनकर कुमार का कविता संग्रह - लोग मेरे लोग

लोग मेरे लोग दिनकर कुमार     और मैं सोचा करता था निहायत सरल शब्द होंगे पर्याप्त। जब मैं कहूं, क्या है हरेक का दिल जरूर चिंथा-चिंथा होगा...

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