शनिवार, 19 जनवरी 2013

बृजेश नीरज की ग़ज़लें - एक पत्थर था जो भगवान बन बैठा घंटियां बजती हैं उसके जागरन के लिए

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साये

वो मुतमइन थे कि सुब्ह नहीं होगी

मैं बेकरार हूं एक किरन के लिए

 

साहिल तलाशता है ठौर और कोई

लहरें मचलती है मिलन के लिए

 

वो फूल खिला और मुरझा भी गया

मयस्सर नहीं गुलिस्तां महक के लिए

 

एक पत्थर था जो भगवान बन बैठा

घंटियां बजती हैं उसके जागरन के लिए

 

उनकी नजरों में कुछ बात जरूर होगी

जो लोग तरसते हैं इनायत के लिए

 

गहराते हैं साये धूप खिलने के साथ

रौशनी कम है अंधेरे की शिकायत के लिए

 

अपना चेहरा भी आईने में देखते होंगे

गालियां दे रहे हैं जो औरों के लिए

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चाहत

देखा गुंचो को सरनिगूँ तो समझा

है चहार सम्त तेरे बांकपन की बात

 

वो माह भी इधर से नहीं गुजरा

कुछ खास है तेरे हुस्न की बात

 

तेरी चाहत में इस कदर खो गए कि

नहीं हो सकती किसी इंकलाब की बात

 

तेरी जुल्फों में दम तोड़ना बेहतर

क्यों करें हम दारों-दसन की बात

 

तेरे जज्ब-ए- अमज़द का असर या और

हर तरफ है मेरी रूसवाइयों की बात

 

 

सरनिगूँ - सिर झुकाए हुए

चहार सम्त - चारों ओर

माह – चाँद

दारों-दसन - सूली के तख्ते और फंदे

जज्ब-ए-अमज़द - हौसला अफज़ाई

 

 

हालात

इन दरख्तों के कद हो गये लंबे

साया भी धरती पर नहीं मुहाल

 

वो पेड़ अब टूटकर गिरने लगा

इधर से गुजरिए तो रखिए ख्याल

 

इस दोपहर तपिश से बेहाल हैं

छत पर आप थोड़ा रखिए पुआल

 

वो कहते रहे तब सब ठीक था

मैं बोला ज़रा तो हो गया बवाल

 

राजा की खिलाफत की मनाही है

कुछ बुरा गुजरे न करिएगा मलाल

 

इस तस्वीर में तो सब खूबसूरत है

आकर देखिए इस बस्ती का हाल

 

--

 

बौने

हुस्न में जज्ब-ए- अमज़द ही नहीं

या हमें आपकी चाहत जो नहीं

 

जिधर भी जाइए अनजाने चेहरे हैं

किसी से मिलने की फुर्सत जो नहीं

 

जब भी गुजरो धुंध सी दिखती है

कोहरा होगा चूल्हे का धुंआ तो नहीं

 

दिलों की तरह बौने हो गये पौधे

इस शहर में कोई बागीचा जो नहीं

 

आपकी बातों में ही मजा आता है

कुछ और सुनने की आदत जो नहीं

 

ईमान वाला है सुना तो है लेकिन

वो आदमी अजायबघर का तो नहीं

 

बर्दाश्त कर लो तुम भी चुपचाप बैठो

लोगों में बोलने की हिम्मत जो नहीं

 

गहराते साये का खौफ सा दिल में

यहां मशाल जलाने को जगह तो नहीं

 

- बृजेश नीरज

Brijesh Kumar Singh

65/44, Shankar Puri,

Chhitwapur Road,

Lucknow-226001

Email- bks.letters@yahoo.in

7 blogger-facebook:

  1. बहुत खूब.अच्छी प्रस्तुति.

    साहित्य का चटखारा लेने के लिए इस ब्लॉग पर भी जाएं
    www.kahekabeer.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया गज़लें....
    साझा करने का शुक्रिया रवि जी.
    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  3. saye ,halat chahat aadi rachnaye dekhi ,roshni kam hai adhnero ki shikayat kai saath

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्या कहूँ बस मज़ा नहीं आया ! एक दो शेर अच्छे हैं ।
    मोहसिन ख़ान
    अलीबाग

    उत्तर देंहटाएं
  5. क्या कहूँ बस मज़ा नहीं आया ! बस एक-दो शेर अच्छे हैं ।
    मोहसिन ख़ान
    अलीबाग

    उत्तर देंहटाएं
  6. bichar achhen hain. kalam rukni nahi chahiye. shukriya
    Manoj 'Aajiz'

    उत्तर देंहटाएं
  7. THIK THIK HAI, BAHUT TO NAHI PAR MAZEDAR HAI,

    उत्तर देंहटाएं

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